सीएसआईआर आईएचबीटी पालमपुर के शोधार्थी नबाव खान ने क्वेरसेटिन को बिना प्रभावित हुए कोलन तक पहुंचाने की तकनीक सुझाई है। उन्होंने एनआईटी हमीरपुर में चल रहे अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन में इस शोध पत्र को पेश किया है। इस सम्मेलन में अमेरिकन केमिकल सोसायटी (एसीएस) की ओर इस शोध पत्र को सर्वश्रेष्ठ चुना गया है। मई माह में यह शोध पत्र जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर में छप चुका है। इस शोध में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट क्वेरसेटिन को कोलन तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए साइक्लोडेक्सट्रिन-आधारित नैनोफाइबर का इस्तेमाल किया गया है।
नबाव ने पहले क्वेरसेटिन को साइक्लोडेक्सट्रिन नामक अणु के साथ एक स्थिर कॉम्प्लेक्स में तैयार किया। तैयार कॉम्प्लेक्स को इलेक्ट्रो स्पीनिंग डिवाइस के जरिये नैनो फाइबर बनाया, जो कि क्वेरसेटिन को पेट के अम्लीय परिस्थितियों से बचाएगा और सीधा बड़ी आंत तक पहुंचाने में कारगर होगा।
81.9 फीसदी क्वेरसेटिन कोलन तक पहुंची
नबाव के इस शोध को दक्षिण अफ्रीका से सम्मेलन में पहुंचे विशेषज्ञों ने भी सराहा है। क्वेरसेटिन में सूजनरोधी और कैंसररोधी जैसे औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो कि पेट का पीएच लेवल 1.2 के चलते अम्लीय परिस्थितियों में जल्दी नष्ट हो जाता है। इससे इसे 7.0 पीएच लेवल वाले कोलन तक पहुंचाना मुश्किल होता है। नबाव की ओर से सुझाई तकनीक के परीक्षणों में पाया गया कि पेट और छोटी आंत में क्वेरसेटिन की केवल 5 फीसदी तक ही रिलीज़ हुई, जबकि कोलन में पहुंचने पर यह मात्रा लगभग 81.9 फीसदी से तक पहुंची है।
इलाज में दवाओं के दुष्प्रभाव होंगे कम : नबाव
सीएसआईआर आईएचबीटी पालमपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक अंकित सनेजा के मार्गदर्शन में भोपाल निवासी नबाव खान ने यह शोध किया है। उनका कहना है कि क्वेरसेटिन एक शक्तिशाली प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है, जो अनेक औषधीय गुणों से भरपूर है। यह पौधों से मिलने वाला तत्व है, जो शरीर को बीमारियों से बचाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट और कैंसररोधी असर रखता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह पेट के अम्लीय वातावरण में जल्दी नष्ट हो जाता है और कोलन तक सही मात्रा में नहीं पहुंच पाता। बड़ी आंत में बिना नष्ट हुए पहुंचने से कोलन कैंसर सहित, अल्सरेटिव कोलाटिस और आंत की सूजन की गंभीर बीमारी के इलाज में सहायता मिलेगी। इस तकनीक में प्रयोग पॉलिमर यूनाइटिड स्टेट फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से मान्यता प्राप्त है।