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हंगामे के बीच एमसी के शिमला के लिए बड़े फैसले

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शिमला के लोगों की जान पर भारी पड़ रही टूटी सीढ़ियों और टूटी रेलिंग को लेकर नगर निगम सदन में जमकर हंगामा हुआ। भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने इस मुद्दे को लेकर नगर निगम सदन का बायकाट कर बचत भवन के बाहर महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
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पार्षदों ने समस्याओं की अनदेखी होने की बात कहते हुए निगम प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। पांच मिनट तक पार्षदों के सदन में वापस नहीं लौटने पर महापौर ने आधा घंटा सदन की कार्य वाही को स्थगित कर दिया।

प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद छोटा शिमला वार्ड से पार्षद सुरेंद्र चौहान ने प्वाइंट ऑफ आर्डर लेते हुए मंगलवार दोपहर रिज मैदान से सटे नगर निगम की एपी शाखा को जाने वाली सीढ़ियों में गिर कर हुई बुजुर्ग की मौत का मामला उठाया।
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निगम पर लगाया लापरवाही का आरोप

उन्होंने कहा कि इसी तरह शहर में सैकड़ों ऐसे स्थान हैं, जहां कभी भी हादसा हो सकता है। नगर निगम को ऐसे स्थानों के बारे में कई बार अवगत कराया गया है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। नगर निगम प्रशासन संवेदनहीन बना हुआ है।

पार्षद संजय परमार, शैलेंद्र चौहान और सरोज ठाकुर ने बहस में हिस्सा लेते हुए अन्य खतरनाक बन चुके स्थानों को गिनवाना शुरू किया। पार्षदों ने कहा कि बीते एक साल के दौरान कई दफा निगम प्रशासन को खतरा बन चुके स्थानों की जानकारी दी गई है, लेकिन कोई गौर नहीं कर रहा।

कई टूटी रेलिंग के तो एस्टीमेट भी पास हो चुके हैं, इसके बाद भी मरम्मत नहीं हो रही। पार्षद कला शर्मा, उमा कौशल, अनूप वैद, कुसुम ठाकुर और भारती सूद ने भी इस बाबत अनदेखी होने के आरोप लगाए।

15 दिन में चिह्नित होंगे स्पॉट : महापौर

महापौर संजय चौहान ने कहा है कि शहर में टूटी हुई रेलिंग, टूटी सीढ़ियों और चलने के लिए खतरनाक बन चुके रास्तों को 15 दिन के भीतर चिह्नित किया जाएगा। कनिष्ठ अभियंताओं को यह जिम्मा सौंपा जाएगा। कितनी रेलिंग, सीढ़ियां, रास्ते खराब हैं, कितनों को ठीक किया गया। इसकी जानकारी नगर निगम की फरवरी की बैठक में दी जाएगी।

अफसरों पर बैठकों में व्यस्त होने का आरोप
पार्षदों ने नगर निगम के अफसरों और कर्मचारियों पर दिन भर बैठकों में व्यस्त होने का आरोप लगाया। पार्षदों ने कहा वार्डों में रेलिंग, सीढ़ियों और रास्तों की हालत कैसी है, इसका पता फील्ड में जाकर लगेगा। लेकिन नगर निगम प्रशासन की बैठकों के दौर ही खत्म नहीं हो रहे हैं।

टेंडर नहीं विभागीय स्तर पर होगी रिपेयर
टूटी रेलिंग लगाने, टूटी सीढ़ियों की रिपेयर मरम्मत करने को लेकर नगर निगम टेंडर नहीं करेगा। इस तरह के आवश्यक कार्यों को नगर निगम विभागीय स्तर पर ही करेगा।

हटेंगे जहां-तहां लटकी बिजली, केबल तार

लोअर बाजार की पार्षद भारती सूद ने क्षेत्र में जहां-तहां लटकी बिजली, केबल और टेलिफोन की तारों से हादसे होने की संभावना बढ़ने का मामला उठाया। इस पर महापौर संजय चौहान ने सहायक आयुक्त को संबंधित विभागों को केबल आपरेटरों को साथ लेकर तीस जनवरी को क्षेत्र का दौरा करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि ऐसे स्थान चिह्नित कर दुरुस्त किए जाएंगे।

आकलैंड टनल की दुकानों से दूर होगी लीकेज
आकलैंड टनल के ऊपर बनाए व्यावसायिक परिसर की दुकानों में लीकेज होने से कारोबारियों को हो रहे नुकसान का मामला पार्षद कला शर्मा ने उठाया। बताया कि लीकेज के चलते कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद कारोबारी परेशान हैं। महापौर ने संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह में मौका निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा है। कहा है कि स्कूल प्रबंधन से भी इस बारे में बात की जाएगी।

कूड़ा नहीं देने वालों पर होगी कार्रवाई

राजधानी में घर-घर से कूड़ा एकत्र करने वाले सैहब सोसायटी के कर्मियों को नियमित तौर पर कूड़ा नहीं देने वालों और मासिक शुल्क नहीं देने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पार्षद निर्मला चौहान ने यह मामला उठाया।

शहरी गरीबों के जल्द मिलेगा आशियाना
ढली में शहरी गरीबों के लिए आशियाना प्रोजेक्ट के तहत बनाए मकानों का आवंटन जल्द किया जाएगा। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नगर निगम लाभान्वित परिवारों की लिस्ट तैयार कर सदन को अवगत करवाएगा।

पार्षद रजनी सिंह ने मकान मिलने में हो रही देरी के लिए नगर निगम प्रशासन को जिम्मेवार ठहराया। महापौर संजय चौहान ने बताया है कि किन्हीं कारणों के चलते आवंटन प्रक्रिया में देरी हो रही है। सरकार से मंजूरी मिलते ही मकान दे दिए जाएंगे।

नहीं रहेगी पानी की किल्‍लत

राजधानी में पीने के पानी की किल्लत को दूर करने के लिए सतलुज नदी से कौल डैम से पानी लाने की योजना की डीपीआर को फंडिंग के लिए नगर निगम ने केंद्र सरकार को भेज दिया है। केंद्र सरकार के तकनीकी मूल्यांकन में यह योजना खरी उतरी है।

केंद्र का शहरी विकास विभाग अब 335.77 करोड़ की इस डीपीआर को आर्थिक मामले विभाग के पास फंडिंग को भेजेगा। कोल डैम प्रोजेक्ट के साथ शहर के वाटर और सीवरेज प्रोजेक्ट को भी जोड़ा है। वाटर प्रोजेक्ट 136.93 करोड़ और सीवरेज प्रोजेक्ट 170.35 करोड़ का है।

यह दोनों प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के तकनीकी मूल्यांकन में खरे उतरे हैं। आर्थिक मामले विभाग अगर तीनों डीपीआर के लिए फंडिंग का इंतजाम करता है तो शहर से पानी की किल्लत दूर हो जाएगी।

सतलुज से आएगा शिमला को पानी

शिमला में पानी के संकट को देखते हुए कोल डैम से पानी लिफ्ट करने की योजना है। इसमें कोलडैम से देवीधार तक पानी लिफ्ट किया जाएगा। यहां से पाइप लाइन के जरिये शिमला पहुंचाया जाएगा।

अभी विभिन्न स्रोतों से जितना पानी शिमला आता है, अकेले कोल डैम से उससे कहीं ज्यादा सप्लाई होने का दावा किया है। डीपीआर के मुताबिक साल 2048 तक 105.63 एमएलडी पानी की सप्लाई शिमला में करने की बात कही है।

लोगों को 24 घंटे मिलेगा पानी
राजधानी की जनता को चौबीस घंटे पीने का पानी देने के प्रोजेक्ट की डीपीआर 136.93 करोड़ रुपये की बनाई है। इसके तहत शहर के लिए पानी की पंपिंग करने वाली पेयजल योजनाओं की मशीनरी बदली जानी है। कई साल पहले बिछी पानी की पाइपों को बदला जाना है।
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एलईडी से जगमगाएंगे शिमला शहर के रास्ते

शहर में लगाए गए स्ट्रीट लाइट प्वाइंटों में एलईडी लाइट लगाई जाएंगी। आए दिन स्ट्रीट लाइट खराब होने की शिकायत को दूर करने के लिए नगर निगम सदन में बुधवार को यह फैसला लिया गया।

निजी कंपनी को एलईडी लाइटें लगाने का काम सौंपा जाएगा। कंपनी पांच साल तक लाइटों की रिपेयर करेगी। शहर में 7229 स्ट्रीट लाइट प्वाइंट्स हैं। एलईडी लगाने और लाइटों की मरम्मत और देखरेख करने की योजना को देने के लिए नगर निगम ओपन टेंडर करेगा।

एलईडी लाइट लगाने वाली कंपनी ही बिजली बिल का भुगतान करेगी। एलईडी प्रयोग से बिजली के बिलों में भारी कमी आने का दावा किया गया है।
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