नगर निगम शिमला का नया मेयर बनने की दौड़ में खलीनी से पार्षद पूर्ण मल, फागली से जगजीत सिंह बग्गा और कृष्णानगर से बिट्टू पाना भी शामिल हो गए हैं। भाजपा की ओर से पहले अनाडेल से जीती कुसुम सदरेट अकेले मेयर पद की दावेदार थी।
मेयर का पद महिलाओं के लिए ही आरक्षित नहीं होने की स्थिति में अनुसूचित जाति के अन्य पार्षदों ने भी अब मेयर बनने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है। इस बदले समीकरण से भाजपा में गुटबाजी बढ़ गई है। भाजपा के लिए अब आम सहमति से मेयर तय करने की राह आसान नहीं है।
निगम चुनाव के दौरान भाजपा ने अनाडेल, नाभा और विकासनगर में मेयर का कार्ड खेलकर अपने समर्थित प्रत्याशियों को जीताने की मतदाताओं से अपील की थी। अनाडेल में हुई जनसभा के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने घोषणा कर कुसुम सदरेट को नगर निगम का नया मेयर तक बताया था।
इसी तरह से विकासनगर और नाभा में भी पार्टी के समर्थकों ने प्रचार किया था। कुसुम सदरेट के चुनाव जीतने के बाद भी भाजपा समर्थकों ने शहर का मेयर कैसा हो, कुसुम सदरेट जैसा हो की नारेबाजी की थी। लेकिन चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद समीकरण बदल गए हैं। अब अनुसूचित जाति के जीतकर आए अन्य प्रत्याशी भी मेयर पद की दौड़ में शामिल हो गए हैं।
भाजपा से संबंधित अनुसूचित जाति के तीनों पुरुष पार्षद पूर्ण मल, जगजीत सिंह बग्गा और बिट्टू पाना पहली बार नगर निगम में जीत कर पहुंचे हैं। ऐसे में अब पार्टी के लिए मेयर चुनने के लिए खूब माथापच्ची करनी पड़ रही है। बहरहाल, सोमवार को दोपहर बाद ही भाजपा के मेयर के दावेदार को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
कांग्रेस से सिमी नंदा और रचना ही दावेदार
शिमला। मेयर बनाने के लिए भाजपा में बेशक घमासान मच गया है लेकिन कांग्रेस में स्थिति स्पष्ट है। कांग्रेस के सिर्फ दो अनुसूचित जाति के पार्षद जीते हैं। कांग्रेस द्वारा नगर निगम में बहुमत प्राप्त करने की स्थिति में नाभा से सिमी नंदा और विकासनगर से रचना के बीच मुकाबला होगा। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित अन्य चार वार्डों से कांग्रेस का कोई भी प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर सका है।