पानी के बिल जारी किए बिना ही नगर निगम ने शहर के 30 हजार उपभोक्ताओं पर बतौर सरचार्ज साढ़े 22 लाख रुपये का बोझ थोप दिया। निर्धारित समय पर पानी का बिल जमा न करने की स्थिति में नगर निगम उपभोक्ताओं पर सरचार्ज लगाता है लेकिन इस बार नगर निगम ने अप्रैल और मई माह का बिल जारी किए बना ही अक्तूबर में जारी बिलों पर सरचार्ज जोड़ रखा है।
नगर निगम की ओर से जारी किए जा रहे पानी के बिलों में एरियर के तौर पर 825 रुपये जोड़े गए हैं। यह एरियर अप्रैल और मई के पानी के बिल के रूप में जोड़ा गया है। ऐसे उपभोक्ता जो अप्रैल और मई के बिल का पहले ही भुगतान कर चुके हैं उनके बिलों में भी 825 रुपये एरियर जोड़ा गया है। शनिवार को नगर निगम की जन शाखा में दर्जनों लोग अपने पानी के बिल लेकर पहुंचे और कर्मचारियों से मनमाने एरियर का कारण पूछा।
आवासीय जनकल्याण समिति के अध्यक्ष अरविंद ने बताया कि नगर निगम लोगों का शोषण करने पर तुला हुआ है। मीटर रीडिंग पर बिल जारी न कर न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना की जा रही है। ऐसे लोग जो शिमला में दो से चार महीने ही रहते हैं उन्हें भी भारी भरकम बिल जारी किए गए हैं। हाउस टैक्स के मामले में भी छोटे फ्लैट और कोठियों पर एक ही नियम लागू किया जा रहा है। नगर निगम की गलती के कारण शहर के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोग नगर निगम से पानी के रिवाइज्ड बिल जारी करने की मांग कर रहे हैं।
यहां समझें, कैसे हो रहा खेल
अप्रैल और मई का औसत बिल - 500
सीवरेज सेस - 250
कुल - 750
एमसी वसूल रहा एरियर - 825
अवैध वसूली - 75 रुपये प्रति बिल
बिल में एडजस्ट कराएंगे पैसा : राय
एरियर के तौर पर लोगों से लिया गया अतिरिक्त पैसा अगले बिलों में ऐडजस्ट किया जाएगा। इसे लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। -पंकज राय आयुक्त, नगर निगम