शिमला में आईपीएच ने दूषित पानी की सप्लाई की और नगर निगम इसे क्लीन चिट देता रहा। नगर निगम की ओर से रोजाना पानी के सैंपल भरने के बावजूद शहर में दूषित पानी की सप्लाई से लोग पीलिया के शिकार होते रहे। शहर में पीलिया फैलने का सिलसिला नवंबर में शुरू हो गया था। बावजूद इसके नगर निगम की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नगर निगम की कार्यप्रणाली पर अब सवाल खड़े हो गए हैं।
शहर को पानी की सप्लाई आईपीएच करता है और लोगों के घरों तक पानी पहुंचने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। शहर के लोगों को सप्लाई होने वाले पानी की जांच का दायित्व भी नगर निगम का है। नगर निगम रोजाना पानी की जांच के लिए सैंपल भी भरता है, बावजूद इसके शहर में दूषित पानी से लोग पीलिया का शिकार हो गए। हालांकि नगर निगम का दावा है कि पानी की सैंपल रिपोर्ट रोजाना स्वास्थ्य विभाग और आईपीएच को भेजी जाती है। नवंबर-दिसंबर में भी नियमित तौर पर रिपोर्ट भेजी गई।
निगम उपमहापौर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि नगर निगम शहर में चुनिंदा जगहों पर नलकों से पानी के सैंपल भरता है। शहर को सप्लाई होने वाला पानी दूषित न हो यह देखना आईपीएच की जिम्मेदारी है। नगर निगम के निरीक्षण के दौरान जब अश्वनी खड्ड में दूषित पानी मिला तो शहर के लिए तुरंत इसकी पंपिंग रोक दी गई।
स्वास्थ्य विभाग का दावा, पीलिया से कोई मौत नहीं
स्वास्थ्य विभाग की ओर से एसआईटी टीम को सौंपी रिपोर्ट में यह कहकर हल्का झटका दिया है कि पीलिया से शिमला शहर में किसी भी पीड़ित की मौत नहीं हुई है। एसआईटी सरकारी आंकड़ों और दस्तावेजों के बाहर छानबीन नहीं कर सकती। लिहाजा एसआईटी आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों के अभाव में गैर इरादतन हत्या का मुकदमा कायम नहीं कर पाएगी।
एसआईटी को यह जानकारी देने के बाद स्वास्थ्य महकमा संदेह के दायरे में आ गया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि निगम विहार और पीजीआई में जिन दो पीड़ित महिलाओं की मौत हुई क्या वह पीलिया से पीड़ित नहीं थीं? निगम विहार में रहने वाली महिला की मौत आईजीएमसी अस्पताल में हुई और बिजली बोर्ड खलीनी में तैनात महिला कर्मचारी की मौत पीजीआई में हुई थीं।
दोनों ही मामलों में परिजनों की ओर से कहा गया कि पीलिया ही मौत का कारण बना है। बताया जा रहा है कि पीजीआई में भी शिमला के काफी लोग पीलिया का इलाज करवा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग पीजीआई से इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट ले सकती है। पीजीआई में हिमाचल के प्रशासनिक अफसर तैनात हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने आज तक यह जानने की जहमत ही नहीं उठाई।
सोमवार को एसआईटी ने आरोपी ठेकेदार की तलाश में डोगर होटल सहित कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग पाया है। ऊपरी शिमला में भी टीमें भेजी र्गइं। आरोपी ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत में दरख्वास्त दे रखी है। इस पर 27 जनवरी को सुनवाई होगी। इससे पहले पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करना चाह रही है इसे पूछताछ करने के बाद ही इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों तक पुलिस पहुंच पाएगी। प्रदेश सरकार की ओर से निलविंत किए आईपीएच के एक्सइएन और एसडीओ पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
इनका निलंबन पीलिया के मामले को लेकर ही हुआ है। मौजूदा समय में आईपीएच का एक जेई और प्लांट का सुपरवाइजर पुलिस रिमांड पर है। वह खुद को बेकसूर और ठेकेदार को कसूरवार ठहरा रहे हैं। ठेकेदार की गिरफ्तारी के बाद ही मामले से पर्दा उठ पाएगा। एसपी डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि ठेकेदार की तलाश की जा रही है। मामले के हर पहलू पर छानबीन की जा रही है।