राजधानी शिमला में सड़कों, रास्तों और गलियों में बेतरतीब तरीके से लटकाई गई केबल से शहरवासियों को अब जल्द राहत मिलने वाली है। आज से हर वार्ड में बेकार पड़ी केबल हटाने का काम शुरू होने वाला है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सड़कों, रास्तों और गलियों में बेतरतीब तरीके से लटकाई गई केबल से शहरवासियों को अब जल्द राहत मिलने वाली है। आज से हर वार्ड में बेकार पड़ी केबल हटाने का काम शुरू होने वाला है। महापौर सुरेंद्र चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को टाउनहॉल भवन में केबल ऑपरेटरों और टेलीकॉम कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में यह निर्देश जारी किए गए। बैठक में उपमहापौर उमा कौशल भी मौजूद रहीं।
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महापौर सुरेंद्र चौहान ने पूछा कि किसकी अनुमति से शहर में यह केबल बिछाई जा रही है। कई जगह रास्तों पर लटकी केबल हादसों का कारण बन रही है। इसे क्यों नहीं हटाया जा रहा। कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि इसके एवज में बिजली बोर्ड को पैसा दिया जाता है। 18 करोड़ रुपये बिजली बोर्ड को दिए हैं। बेतरतीब तरीके से बिछी केबल के सवाल पर कंपनियों ने कहा कि कई जगह बंदर केबल से लटकते हैं जिससे यह रास्तों पर लटक जाती हैं। शहर में कई जगह केबल के गुच्छे इसलिए रखे हैं ताकि इनका और आगे इस्तेमाल हो सके। कहा कि हर जगह से केबल नहीं हटा सकते लेकिन बेकार और बेतरतीब केबल जरूर साफ कर सकते हैं।
हटाना होगा जमघट और बेकार केबल
महापौर ने निर्देश दिए कि बिजली पोल पर लटकाई गई खाली और बेकार केबल तुरंत हटानी होगी। इनके गुच्छे गलियों में नहीं दिखने चाहिए। पैदल रास्तों पर कहीं भी केबल बेकार पड़ी नहीं होनी चाहिए। कई जगह रास्तों और सड़कों पर केबल लटकी हैं। इन्हें एक ही जगह से लटकाने का प्रबंध किया जाए। बिजली पोल से कई जगह केबल का जमघट है, उसे भी ठीक किया जाए। पार्षद के साथ बुधवार से ही वार्डाें में यह काम शुरू किया जाए। महापौर ने कहा कि बिजली बोर्ड के तो सिर्फ शहर में खंभे लगे हैं, बाकी संपत्तियां नगर निगम की हैं। ऐसे में इसका शेयर नगर निगम को भी मिलना चाहिए। निगम इस बारे में बिजली बोर्ड से भी बात करेगा। साथ ही भवनों पर अवैध रूप से लगे टावरों से पैनल्टी वसूलने का भी फैसला लिया है।