पिछले सदन में विधायक जनारथा के विरोध के बाद टला था फैसला
30 हजार भवन मालिकों से वसूला जाता है प्राॅपर्टी टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में हर साल प्राॅपर्टी टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव पर इस माह सदन की मुहर लग सकती है। केंद्र सरकार के टैक्स बढ़ाने के नए फार्मूले को लागू करने के लिए नगर निगम प्रशासन ने तैयारी कर ली है।
जून के अंतिम हफ्ते में होने वाली नगर निगम की मासिक बैठक के एजेंडे में फिर से इस प्रस्ताव को शामिल किया जा रहा है। मंजूरी मिलने के बाद शहर में हर साल टैक्स में बढ़ोतरी होगी। हालांकि यह बढ़ोतरी प्रदेश की पांच साल की विकास दर के आधार पर तय की जाएगी। पहले इस साल टैक्स में चार फीसदी की बढ़ोतरी होनी है। नगर निगम शिमला शहर में 30 हजार भवन मालिकों से प्राॅपर्टी टैक्स वसूलता है। नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि केंद्र से मिलने वाली ग्रांट के लिए इसे लागू करना जरूरी है। केंद्र से इस बारे में निर्देश मिले हैं। यदि इसे लागू नहीं करते हैं तो शहर के विकास के लिए मिलने वाली करीब 35 करोड़ रुपये की केंद्रीय ग्रांट बंद हो सकती है।
इससे पहले 30 मई को हुए कांग्रेस शासित नगर निगम के पहले सदन में भी इस प्रस्ताव को पेश किया गया था। लेकिन शहरी विधायक हरीश जनारथा ने इसका विरोध कर दिया था। विधायक ने शहरवासियों पर बोझ डालने की बजाय डिफाल्टरों से लंबित टैक्स वसूलने के निर्देश दिए थे। विधायक के विरोध के चलते इसे टाल दिया गया था। लेकिन इस बार फिर से इसे सदन में पेश किया जाएगा।
पहले तीन साल बाद बढ़ता था टैक्स
शहर में नगर निगम यूनिट एरिया मैथड के तहत भवन मालिकों से टैक्स लेता है। भवन के आकार के हिसाब से टैक्स तय होता है। कोर एरिया में भवनों का टैक्स मर्ज एरिया से ज्यादा है। इसी तरह कच्चे मकानों का टैक्स कम है। रिहायशी मकानों का भी व्यावसायिक भवनों से कम टैक्स रहता है। पहले शहर में हर तीन साल बाद टैक्स में दस फीसदी की बढ़ोतरी होती थी लेकिन अब केंद्र के निर्देश लागू होने से हर साल टैक्स में चार से पांच फीसदी तक की बढ़ोतरी होेगी।