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इंतजार करते रहे अफसर, नहीं आए पार्षद, बैठक स्थगित

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एमसी की जीएफसी बैठक में नहीं पहुंचे सदस्य, स्थगित
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एमसी की वित्त संविदा एवं योजना समिति की बैठक में सिर्फ एक पार्षद पहुंची
क्रॉसर
कॉल करते रहे अधिकारी, नहीं आए पार्षद
पौने घंटे के इंतजार के बाद स्थगित हुई बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में नए कामों को मंजूरी देने और जनता को सुविधाएं देने के लिए बुलाई जा रही नगर निगम की बैठकों के लिए अब पार्षदों के पास वक्त नहीं निकल रहा। पार्षदों के न पहुंचने से मंगलवार को बुलाई नगर निगम की वित्त संविदा एवं योजना समिति (जीएफसी) की बैठक स्थगित करनी पड़ी।
समिति की बैठक सुबह साढ़े 11 बजे बुलाई थी। इस समिति में नगर निगम महापौर सत्या कौंडल के अलावा चार पार्षद सदस्य हैं। इनमें दो भाजपा और बाकी दो कांग्रेस पार्षद शामिल हैं। कांग्रेस पार्षद सिमी नंदा साढ़े 11 बजे बैठक के लिए मेयर दफ्तर पहुंची। इसके थोड़ी देर बार नगर निगम आयुक्त आशीष कोहली और अन्य अधिकारी भी पहुंच गए। नियमानुसार कम से कम तीन पार्षद सदस्य होने पर ही कोरम पूरा माना जाता है। ऐसे में कोरम पूरा करने के लिए अफसर सदस्य पार्षदों को फोन लगाते रहे।
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पता चला कि समिति सदस्य एवं कांग्रेस पार्षद दिवाकर देव शर्मा पांव में फ्रैक्चर के चलते बैठक में नहीं आ सकते। बाकी दो पार्षदों पूरनमल और विवेक शर्मा से भी संपर्क किया लेकिन यह नहीं आए। पौने घंटे के इंतजार के बाद बैठक स्थगित कर दी गई। अब इस बैठक में लगने वाले प्रस्ताव सीधे नगर निगम सदन में चर्चा के लिए लाए जाएंगे। बैठक में मज्याठ वार्ड के तहत तारादेवी से भरयाल तक 41.68 लाख से सड़क चौड़ी करने, इंजनघर में निगम पार्किंग से दक्षिण विहार तक 12.44 लाख से रास्ता बनाने, गरीब परिवारों को आवास अलॉट करने और भरयाल प्लांट में शेड बनाने जैसे अहम प्रस्तावों पर फैसला लिया जाना था।
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बिना एजेंडे के बुलाई जीएफसी बैठक, नहीं आए पार्षद
नगर निगम की मेयर सत्या कौंडल की अध्यक्षता में होने वाली जीएफसी की बैठक भी मंगलवार को नहीं हो पाई। यह बैठक दोपहर साढ़े 12 बजे होनी थी लेकिन सभी चारों सदस्य पार्षद इस बैठक में नहीं आए। कमेटी में पार्षद कमलेश मेहता, कुसुमलता ठाकुर, इंद्रजीत सिंह, रेणु चौहान शामिल हैं। पार्षद कमलेश मेहता ने बताया कि बैठक के लिए कोई प्रस्ताव या एजेंडा नहीं दिया था। पिछली कई बैठकें भी बिना एजेंडे के हो चुकी हैं जिसमें किसी प्रस्ताव पर चर्चा करने की बजाय महज पार्षदों को टी पार्टी करवाई जाती है। अब इस कमेटी के पार्षद बैठक में नहीं आ रहे। इनका कहना है कि निगम प्रस्ताव लाए जिन पर चर्चा हो सके।
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