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सप्लाई 1 घंटा, बिल थमा रहा 24 घंटे का

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शहर में एक घंटा पीने के पानी देकर उपभोक्ताओं से 24 घंटे का पानी बिल वसूला जा रहा है। फ्लैट रेट पर पानी बिल देने का नगर निगम का फंडा घरेलू उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रहा है।
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स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए नगर निगम ने फ्लैट बिल देना शुरू कर अपनी परेशानियां को कम कर ली हैं लेकिन, उपभोक्ताओं को मुश्किल में डाल दिया है।

घरेलू उपभोक्ताओं को पीने के पानी का मीटर रीडिंग के आधार पर औसतन 109 रुपये बिल देना पड़ता था लेकिन फ्लैट रेट 209 रुपये है। ऐसे में जिन भवन मालिकों ने किराये पर मकान दिए हैं ऐसे उपभोक्ताओं को तो फ्लैट रेट बिल देने में नुकसान नहीं है लेकिन, छोटे परिवारों के लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ गया है।

छोटे परिवारों पर बड़ा बोझ

शहर में प्रति व्यक्ति के हिसाब से 110 लीटर पानी दिया जाता है। इस तरह से चार सदस्यों के परिवारों को प्रति माह 13,200 लीटर पानी दिया जाता है।

नगर निगम उपभोक्ताओं को 8.25 रुपये प्रति हजार लीटर की दर से पानी की बिल जारी करता रहा। ऐसे में हर माह बिल की यह राशि 108.90 रुपये बैठती है। जबकि इन उपभोक्ताओं से नगर निगम 209 रुपये वसूल रहा है।

वहीं, फ्लैट रेट पर पानी बिल के फैसले से छह व इससे अधिक सदस्यों के परिवारों को भी कुछ ज्यादा राहत नहीं मिली है। शिमला में छह सदस्यों के परिवारों को प्रतिदिन 110 लीटर की मात्रा में पानी देने से यह बिल 163.35 रुपये प्रति माह बैठता है जबकि बिल के फ्लैट रेट निर्धारित होने से इन परिवारों को भी प्रति माह 209 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
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शिमला में 7 हजार से अधिक हैं छोटे परिवार

शिमला में पांच से कम सदस्यों के परिवारों की संख्या सात हजार से अधिक है। इसमें फ्लैट धारकों की संख्या अधिक है। इन उपभोक्ताओं को भी बिना पानी खर्च किए हुए प्रतिमाह 209 रुपये का बिल चुकाना पड़ रहा है।

राजधानी में अक्तूबर 2012 से पानी का बिल फ्लैट 150 रुपये किया गया। हर साल इसमें दस प्रतिशत बढ़ोतरी होती है। पानी बिल का 15 प्रतिशत सीवरेज सेस भी इसमें जोड़ा जाता है। इस हिसाब से शहर में रहने वाले लोगों को मार्च 2013 तक प्रति माह 173 रुपये के हिसाब से बिल चुकाना पड़ा।

अप्रैल 2013 से इस बिल में दस फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 191 रुपये चुकाने पड़े। अब अप्रैल 2014 से मासिक बिल की राशि बढ़कर 209 रुपये हो गई है। नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह ने कहा है कि इस मामले को लेकर एक संस्था हाईकोर्ट गई है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
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