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Shimla News: मेयर ने दिल्ली में उठाया शिमला के लिए स्पेशल ग्रांट का मामला

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शहरी निकायों के लिए जनाग्रह
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में रखा प्रस्ताव
केंद्र से मिलने वाला अनुदान शहरी निकायों के खाते में डालें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने शिमला जैसे पहाड़ी शहरों को केंद्र से स्पेशल ग्रांट देने का मामला उठाया है। नई दिल्ली में बुधवार को शहरी निकायों के लिए आयोजित जनाग्रह कार्यक्रम के दौरान महापौर ने अपना प्रस्ताव रखा। इस कार्यक्रम में कई सांसदों समेत देशभर के शहरी निकायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
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महापौर ने कहा कि केंद्र सरकार को पहाड़ी क्षेत्रों के लिए वहां की परिस्थितियों को देखते हुए ग्रांट तय करनी चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण की लागत मैदानी शहरों से ज्यादा है। इसलिए विशेष ग्रांट मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिमला जैसे शहर पर्यावरण बचाने के लिए भी अहम योगदान दे रहे हैं। पौधरोपण और सफाई व्यवस्था के जरिये पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दिया जा रहा है। इसके लिए केंद्र को विशेष अनुदान की व्यवस्था करनी चाहिए। महापौर ने केंद्र से मिलने वाला अनुदान सीधे शहरी निकायों के खाते में डालने का भी मामला उठाया। उन्होंने कहा कि अभी प्रदेश सरकारों के जरिये निकायों को पैसा आता है। इसमें पैसा जारी होने में काफी समय लग जाता है जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। महापौर ने शिमला शहर में बन रहे व्यावसायिक परिसर, स्मार्ट सिटी के अन्य बड़े प्रोजेक्टों की जानकारी भी कार्यक्रम में दी। साथ ही पहली बार पेश किए गए जलवायु बजट के बारे में भी प्रतिभागियों को रिपोर्ट दी। महापौर का कार्यकाल पांच साल करने को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। महापौर ने कहा कि किसी भी शहर के मेयर को पांच साल का कार्यकाल जरूरी है ताकि विकास की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की जा सके।
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