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बलग में ‘अंधविश्वास’ का मेला बंद, गांव जाने वाले सभी रास्ते सील

Mon, 09 Apr 2018 11:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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बलग में अंधविश्वास का मेला बंद हो गया है। इस मामले में प्रशासन ने आखिर हस्तक्षेप कर दिया है। बलग में दो गुटों में लड़ाई होने की खुफिया सूचना मिलते ही एसडीएम ठियोग मोहनदत्त शर्मा अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ मौके पर गए और उन्होंने प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए यहां लोगों के जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। 

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अब न तो कोई गाड़ी फागू से कोट (बलग) स्थिति कथित अवतारी बच्चों के घर जाएगी और न ही गिरिपुल या अन्य रास्तों से जा सकेंगे।

बच्चों ने मांगी सुरक्षा

इसके लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। यहां जाने वाले सभी रास्ते सील कर दिए हैं। एसडीएम ठियोग को सूचना मिली कि बलग के कोट में जहां बच्चे प्रवचन दे रहे हैं, वहां दो गुटों में भिड़ंत हो सकती है।

इस पर एसडीएम मोहनदत्त शर्मा खुद मौके पर गए। उनके साथ स्थानीय उपमंडलीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी दल बल के साथ यहां गए।

पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए दो गुटों को लड़ने से पहले ही रोक दिया। इसके बाद एसडीएम ने बच्चों और उनके मां-बाप से लंबी बातचीत की। आदेश जारी किए कि कोई भी व्यक्ति इन बच्चों के पास नहीं जाएगा।

न ही कोई गाड़ी ही इस क्षेत्र में जाएगी। केवल स्थानीय लोग ही अपने घरों के लिए आवाजाही कर सकेंगे। बच्चों के घर वे भी नहीं जा पाएंगे।

खुद को बात रहे शिव का अवतार

एसडीएम ठियोग मोहनदत्त शर्मा ने बताया कि बच्चों ने अपने लिए खुद सुरक्षा मांगी है। उन्होंने प्रशासन को लिखकर दिया है कि उनके पास कोई नहीं आएगा। उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए।

साथ ही उन्होंने यह भी लिखकर दिया है कि वे अपना इलाज करवाने को भी तैयार हैं। उनके मां-बाप ने भी कहा है कि वे बच्चों का इलाज खुद करवाएंगे। 

छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ उठा रहे थे आवाज
बलग में रोज हजारों लोग तीन भाई-बहनों को शिव, काली और विष्णु का अवतार मानकर वहां दुख निवारण के लिए जा रहे थे। 
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सोशल मीडिया में प्रोत्साहन

ये बच्चे भी प्रवचन देते हुए लोगों को दवाइयां छोड़ने और बगैर दवा के ठीक होने जैसी सलाहें दे रहे थे।

हालांकि इन बच्चों ने जहां एक ओर खुद को अवतारी घोषित किया और अजीब बाते कर रहे थे, वहीं वे क्षेत्र में व्याप्त छुआछूत और भेदभाव जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।

उनके इस पक्ष को सोशल मीडिया में प्रोत्साहन मिल रहा था तो अंधविश्वास फैलाने वाले पक्ष को बुद्धिजीवी वर्ग खारिज कर रहे थे।
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