शहीद अंकेश की मां कश्मीरी देवी।
- फोटो : संवाद
तू खिलौने की तरह आया था और खिलौने की तरह ही चला गया। बेटा तुझे कई बार डांटा भी, जाने-अनजाने में कोई गलती हुई हो तो माफ कर देना। शहीद अंकेश भारद्वाज को आखिरी विदाई देते समय मां कश्मीरी देवी ने ये शब्द कहे। सेना के जवानों ने शहीद अंकेश की फोटो मां को दी तो उन्होंने इसे सीने से लगा लिया। फोटो को चूमकर बेटे को नमन किया। मां कश्मीरी देवी ने बेटे का माथा चूमकर तो पिता बांचा राम ने सैल्यूट कर बेटे को अंतिम विदाई दी। शहीद के पिता खुद बीएसएफ से सेवानिवृत्त हैं।
शहीद अंकेश की अंतिम यात्रा में शामिल होकर मां ने जिगर के टुकड़े को मुक्ति धाम तक पहुंचाया। जिस वक्त माता-पिता ने शहीद बेटे को सलामी दी तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। शहीद की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। इनमें महिलाएं, युवतियां और छोटे छोटे बच्चे भी शामिल थे। हालांकि, महिलाएं मुक्तिधाम तक न के बराबर ही जाती हैं, लेकिन शहीद की अंतिम झलक पाने और उनके अंतिम सफर के दौरान दर्जनों महिलाएं सीर खड्ड किनारे मौजूद रहीं।
शहीद बेटे की पार्थिव देह घर पहुंचते ही बेसुध हो गई मां
शहीद अंकेश भारद्वाज की पार्थिव देह घर पहुंचते ही मां कश्मीरी देवी बेसुध हो गईं। महिलाएं उनको संभालती रहीं। पहले से घर में मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। अंकेश की पार्थिव देह के साथ शहीद बेटे का सामान भी लाया गया। काले रंग के अटैची पर अंकेश का नाम लिखा था। इसे देखकर कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पाया।
पिता बोले - छोटा बेटा भी जाएगा सेना में, खुद करवा रहे तैयारी
शहीद अंकेश के पिता बांचा राम की आंखों में आंसू थे और लफ्ज खामोश थे, लेकिन बेटे की शहादत से सीना गर्व से चौड़ा था। शहीद अंकेश के पिता ने कहा कि उनका छोटा बेटा भी सेना में जाकर देश सेवा करेगा। छोटे बेटे को वह खुद सेना में भेजने की तैयारी करवा रहे हैं। देश सेवा का जज्बा उनके खून में है और वह हमेशा रहेगा।