सक्रांति से सूर्य ने नीच राशि से वृश्चिक राशि में किया प्रवेश, पूरा महीना सूर्य को अर्घय देने से मिलेगा लाभ
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शरीर रहता आरोग्य, ऊंचे पद की होती है प्राप्ति : राजेश संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सनातन धर्म में बारह महीनों में से मार्गशीर्ष महीने को श्रेष्ठ माना गया है। मार्गशीर्ष महीना संस्कार जैसे शुभ कार्य और भगवान की उपासना करने के लिए अच्छा माना जाता है।
वृश्चिक संक्रांति यानि शनिवार से मार्गशीर्ष महीने की शुरुआत हो गई है। यह महीना भगवान कृष्ण और सूर्य देव को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस महीने में भगवान कृष्ण की उपासना करने से मनुष्य को जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिलती है। सूर्य देव की पूजा करने से शरीर आरोग्य रहता है। जीवन में मनुष्य का ऊंचे पद की प्राप्ति के लिए भी इस महीने सूर्यदेव की अराधना करनी चाहिए। ज्योतिषाचार्य डॉ. राजेश भारद्वाज ने बताया कि वृश्चिक संक्रांति से मार्गशीर्ष महीने की शुरुआत हुई है। इस संक्रांति से सूर्य देव ने वृश्चिक राशि में प्रवेश किया है और शनिवार सुबह 7:35 बजे सूर्य नीच की राशि तुला से वृश्चिक राशि में गए।
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उन्होंने बताया कि वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं और मंगल सूर्य देव के मित्र हैं। ऐसे में मार्गशीर्ष महीने में सूर्य देव की अराधना करना शुभ माना गया है। सूर्य देव अपने भक्तों को ऊर्जा, स्फूर्ति और गुप्त रूप से नया करने की प्रेरणा देते हैं। इस पूरे महीने सूर्य देव को जल से अर्घय देने से शरीर आरोग्य रहता है। आंखों और हड्डियों से जुड़े रोग दूर होते हैं। बताया कि सूर्य देव पिता के कारक हैं। सूर्य उपासना करने से पिता के साथ संबंध अच्छे होते हैं और जीवन में ऊंचे पद की प्राप्ति होती है। बताया कि मार्गशीर्ष महीना भगवान कृष्ण को बेहद प्रिय है। इसलिए यह महीना विवाह, संस्कार, धार्मिक आयोजन करने के लिए बेहद शुभ है। द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने उपदेश दिया था कि जो भक्त इस महीने में मेरा ध्यान, जप, साधना, यज्ञ करेगा उसकी मनोकामनां पूरी होंगी। ज्योतिषशास्त्र में मार्गशीर्ष महीने में स्नान और दान का महत्व बताया गया है। इस महीने में गरीबों और ब्राह्मणों में अन्न, वस्त्र का दान करना चाहिए। ग्रहों की शांति के लिए भी उचित दान करना शुभ माना गया है।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया था उपदेश
भगवान श्रीकृष्ण को बारह महीनों में से मार्गशीर्ष महीना सबसे अधिक प्रिय है। महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए स्वयं को मार्गशीर्ष महीने के रूप में बताया था। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि अगर कोई मुझे प्राप्त करना चाहता है तो वह मार्गशीर्ष महीने में पूजा, जप, पाठ, ध्यान और यज्ञ से मुझे प्राप्त कर सकता है।