एक जेई पदोन्नत होकर गए पीडब्ल्यूडी में भेजे गए
सुमित ठाकुर शिमला। नगर निगम में कनिष्ठ अभियंताओं (जेई) की भारी कमी हो गई है। इनकी कमी के चलते शहर के विकास और निगरानी से जुड़े कई अहम कार्य प्रभावित होने शुरू हो गए हैं। नगर निगम की वास्तुकार शाखा में अभियंताओं की कमी से फाइलें और शिकायतें लटकनी शुरू हो गई हैं।
शहर में नगर निगम के मौजूदा समय में 34 वार्ड हैं। इन वार्डों में होने वाले भवन निर्माण से जुड़े कामों और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी छह जेई के पास है। अब एक जेई की प्रमोशन हो गई है। ऐसे में वह पदोन्नत होकर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में चले गए हैं। वहीं निगम में अब एक जेई कम होने के बाद पांच जेई के पास नक्शे पास करने, अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने, भवन निर्माण से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने और विभिन्न विकास कार्यों की निगरानी जैसे दायित्वों की जिम्मेदारी आ गई है। नगर निगम क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे निर्माण कार्यों और अवैध कंस्ट्रक्शन जैसी दो से तीन नई शिकायतें रोजाना आती हैं। ऐसे में इस तरह की शिकायतों के निपटान को लेकर पूरा दिन बीत जाता है। ऐसे में सीमित स्टाफ के कारण समय पर निरीक्षण और कार्रवाई करना मुश्किल भरा हो गया है। नगर निगम में एक-एक जेई के पास करीब सात से आठ वार्ड हैं। ऐसे में अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो निगम की आने वाले दिनों में मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
सरकार के ध्यान में है मामला
जेई की कमी का मामला सरकार के ध्यान में है। ऐसे में आउटसोर्स पर खाली पदों को भरने के लिए कहा है। जल्द यह प्रक्रिया पूरी होगी। इनके आने से न केवल कार्यभार कम होगा बल्कि विकास कार्यों और रेगुलेशन से जुड़े मामलों में भी तेजी आएगी। - भूपेंद्र अत्री, आयुक्त नगर, निगम शिमला