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Himachal: दिन-रात खेतों की रखवाली, हाथ फिर भी खाली, बंदरों के आतंक से किसानों ने छोड़ी मक्की की खेती

Wed, 06 Jul 2022 04:49 PM IST
Krishan Singh मुनीश महाजन, संवाद न्यूज एजेंसी, जसूर (कांगड़ा)

सार

 पिछले एक दशक के दौरान बंदरों और लावारिस पशुओं की समस्या ने खतरनाक रूप धारण कर लिया है। सरकारें इस समस्या का समाधान करने में कोई प्रभावी समाधान खोजने में विफल रही हैं।  
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रिट में बंदरों ने उजाड़ी मक्की की फसल। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के उपमंडल नूरपुर में कई किसानों ने बंदरों और लावारिस पशुओं के खतरे के कारण मक्की की खेती करना छोड़ दी है। एक अनुमान के अनुसार खरीफ फसल के सीजन में लगभग 4000 एकड़ भूमि खाली पड़ी है। पिछले एक दशक के दौरान बंदरों और लावारिस पशुओं की समस्या ने खतरनाक रूप धारण कर लिया है। सरकारें इस समस्या का समाधान करने में कोई प्रभावी समाधान खोजने में विफल रही हैं। इसके चलते किसानों को विशेष रूप से खरीफ फसल के सीजन में अपने खेतों को खाली छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

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इस खाली पड़ी भूमि के अब बंजर होने का खतरा पैदा हो गया है। कोपड़ा ग्राम पंचायत के किसान सुभाष सिंह, खियाल सिंह, दीवान सिंह और किशोर सिंह ने बताया कि वह वर्षों से मक्की की खेतीबाड़ी करते आ रहे हैं। मगर पिछले कुछ वर्षों से बंदर और लावारिस पशु फसलों को उजाड़ रहे हैं। बंदर, सूअर और लावारिस पशुओं से फसल बचाने के लिए दिन-रात रखवाली करनी पड़ती है। इसके बावजूद वह फसल को उजाड़ ही देते हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से हालात इतने खराब हो चुके हैं कि किसानों को उनकी फसल की लागत भी हाथ नहीं लग रही। रिन्ना के कृष्ण सिंह, बदूही से अनूप सिंह और सतपाल, चट्टा गांव के रणबीर सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान अपनी बची हुई मक्की की फसल को बेचकर लागत प्राप्त करने में विफल रहे। फसल का बड़ा हिस्सा बंदरों और लावारिस पशुओं ने नष्ट कर दिया। 
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वहीं, क्षेत्र के प्रगतिशील किसान पवन धीमान, मुकेश शर्मा और अश्विनी शर्मा ने कहा कि एक दशक में राज्य में बंदरों की आबादी कई गुना बढ़ गई है। बीज, खाद और कीटनाशक दवाओं के दामों में भी एक दशक में पांच गुना वृद्धि हो चुकी है। राज्य सरकार के पास लावारिस पशुओं के खतरे को रोकने की कोई रणनीति नहीं है। 

समस्या का स्थायी हल जरूरी
भारतीय किसान यूनियन कांगड़ा के जिलाध्यक्ष सुरेश सिंह पठानिया ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अपील की है कि बंदरों और लावारिस पशुओं की समस्या को समाप्त करने के लिए अब स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है। पशुओं को बेसहारा छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जिले में बड़ी संख्या में किसानों ने अपने खेतों को खाली छोड़ दिया है। उन्होंने अफसोस जताया कि बंदरों और लावारिस पशुओं का खतरा कृषि क्षेत्र को सता रहा है, लेकिन सरकार के पास इस समस्या से निपटने के लिए कोई प्र्रभावी नीति नहीं। 

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