पुरानी सरकार जाने और नई सरकार आने के बीच हिमाचल के सरकारी जोनल अस्पताल मंडी में दिल दहला देने वाला मामला आया है। यहां गर्भवती महिलाओं को कड़ाके की ठंड लेबर रूम के बाहर गैलरी और कमरे में फर्श पर लेटा दिया गया। गर्भवती महिलाएं दिन भर प्रसव पीड़ा से दिन भर तड़पती रहीं, लेकिन उन्हें बेड तक मुहैया नहीं करवाए गए।
दिन भर ऐसे ही हालात रहे, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। यहां तक कि प्रसूता महिलाएं और उनके नवजात बच्चे भी ठंडे फर्श पर ही कंबल बिछाकर लेटे रहे। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले और सबसे बड़े अस्पताल में अगर ऐसा हो तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह का इलाज मिल रहा है।
बताया जा रहा है कि यहां कई बार ऐसे हालात आए लेकिन, अस्पताल प्रबंधन की आंखों पर बेशर्मी की पट्टी इस कदर बंधी है कि इस कुव्यवस्था को देखकर भी नजरअंदाज किया जा रहा है। हालांकि, इससे पहले भी इस व्यवस्था को उजागर किया जा चुका है लेकिन, अस्पताल प्रबंधन जल्द बिस्तरों का आश्वासन देकर अपनी गैरजिम्मेदारी पर पर्दा डाल लेता है।
जोनल अस्पताल नेरचौक मेडिकल कॉलेज से अटैच है। यहां सस्ते सरकारी इलाज की आस में दूर-दूर से गर्भवती महिलाएं और अन्य रोगी पहुंचते हैं लेकिन, कड़ाके की ठंड में इस तरह की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
महज पचास बेड की सुविधा
जोनल अस्पताल मंडी में पचास बेड की सुविधा है। सस्ते और सुरक्षित इलाज के लिए कुल्लू, बिलासपुर, लाहौल और हमीरपुर के लोग भी यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। मेडिकल कॉलेज नेरचौक अटैच होने के बाद यहां रोगियों की संख्या काफी अधिक हो चुकी है। लेकिन, यहां व्यवस्था न के बराबर है।
लाइव: करीब पौने एक बजे हैं। अस्पताल के गायनी वार्ड के बाहर गर्भवती महिलाएं फर्श पर लेटी हैं। जरूरत से अधिक मरीजों की बात कहकर इन महिलाओं को बिस्तर नहीं मिल सका है।
कुछ लोगों ने बाजार से मैट खरीदकर गर्भवती महिलाओं को फर्श पर लेटाने की व्यवस्था की है। ठंड से महिलाएं कराह रही हैं। साथ ही शौचालय हैं। जिससे फर्श पर लेटी महिलाओं को संक्रमण का खतरा भी सता रहा है। तीमारदार काफी परेशान हैं। लेकिन, उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं।
पांच दिन बाद भी नहीं मिला बेड
बल्ह के अमर ज्योति ने कहा कि उसने अपनी पत्नी को प्रसव के लिए सोमवार को दाखिल करवाया है। लेकिन अभी तक उन्हें बेड की व्यवस्था नहीं मिली है। जिसके चलते उन्हें जमीन पर ही बिस्तर लगाकर बैठना पड़ रहा है।
जमीन पर भी नहीं मिल रही है जगह
वहीं, बंजार के विपिन कुमार ने कहा कि पिछले दो दिनों से उन्हें बेड की व्यवस्था नहीं मिली है। हालात ऐसे हैं कि शाम के वक्त उन्हें अंदर-बाहर जाने के लिए पैर रखने को जगह तक नहीं मिलती।
बदतर हैं हालात
वहीं सरकाघाट क्षेत्र के मंडप गांव के सुनील कुमार ने कहा कि अस्पताल में हालात बदतर हैं। पत्नी को एडमिट करवाए हुए पांच दिन हो गए है लेकिन अभी उन्हें बेड की सुविधा नहीं मिली है। जिसके चलते उन्होंने सरकार और विभाग के खिलाफ खासा रोष है। उन्होंने बेड की उपलब्धता की मांग की है।
स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं
मंडी की विमला कुमारी ने कहा कि यहां पर स्वास्थ्य सुविधा पूरी तरह से चरमरा गई है। स्वास्थ्य मंत्री के अपने जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहाल हैं। दूरदराज के तीमारदारों को काफी दिक्कतें आ रही हैं। स्थानीय लोग तो जैसे तैसे शाम को अपने घरों को निकल जाते हैं लेकिन दूरदराज के लोगों को काफी दिक्कतें आ रही हैं।
40 बेड 156 मरीज : एमएस
एसएस टीसी महंत ने कहा कि कुल्लू्, सुंदरनगर में गायनी विशेषज्ञ न होने के चलते सारा भार मंडी जोनल अस्पताल पर है। यहां गायनी में 40 बेड हैं। लेकिन 156 मरीज हैं। कुल मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ चुका है। 327 बेड और 467 मरीज भर्ती हैं।
अस्पताल प्रबंधन की पूरी कोशिश है कि कोई बिना इलाज के न लौटे। वीरवार को ही 15 सजेरियन और 25 नार्मल डिलीवरी हुई हैं। मरीजों को एक दूसरे वार्डों में शिफ्ट किया जा रहा है। अस्पताल का विस्तार किया जा रहा है लेकिन, भवन निर्माण एकदम नहीं हो सकता।