ब्यास नदी में लारजी प्रोजेक्ट प्रबंधन की गलती से ही हैदराबाद के 24 छात्र बह गए। मगर सरकार इसके बावजूद दोषियों को बचाने में लगी रही। हादसे पर मंडी के मंडलायुक्त ओंकार शर्मा की रिपोर्ट से हड़कंप मच गया है। पहले दिन से चारों तरफ से 23 छात्र-छात्राओं की मौत के जिम्मेदार प्रोजेक्ट प्रबंधन को सरकार की तरफ से क्लीन चिट दी जा रही थी।
ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया और बिजली बोर्ड प्रबंधन से लेकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह तक इस मामले में लारजी प्रबंधन को क्लीन चिट दे चुके हैं। अब बोर्ड प्रबंधन और सरकार के सामने यह संकट है कि आखिर उस रिपोर्ट के आधार पर किस-किस पर कार्रवाई शुरू की जाए।
बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक पीसी नेगी ने 12 जून को अपनी आंतरिक रिपोर्ट प्रधान सचिव ऊर्जा को सौंपी थी। इसमें किसी स्तर पर प्रोजेक्ट प्रबंधन को दोषी नहीं ठहराया गया। इसके बाद बोर्ड के मुख्य अभियंता मंडी की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच रिपोर्ट 17 जून को प्रबंध निदेशक को सौंपी। इसमें भी प्रोजेक्ट प्रबंधन की लापरवाही नहीं पाई गई।
एसएलडीसी की कार्यशैली पर भी सवाल
रिपोर्ट में यहां तक उल्लेख किया गया कि सारे प्रोटोकाल को फॉलो किया गया। पहले दिन से ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह तक प्रोजेक्ट अफसरों की लापरवाही मानने को तैयार नहीं थे। लेकिन सभी पहलुओं की जांच के बाद मंडलायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में प्रोजेक्ट प्रबंधन की लापरवाही पाई है।
स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) हिमाचल प्रदेश तक की कार्यशैली पर अंगुली उठाई गई है। अब हाईकोर्ट ने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कर सरकार से रिपोर्ट तलब की है। ऐसे में सवाल यह है कि क्लीन चिट देने वालों का क्या होगा? इस हादसे की गाज किन अफसरों पर गिरेगी।
हालांकि सरकार के आलाअफसरों ने साफ कर दिया है कि अगर रिपोर्ट में प्रोजेक्ट प्रबंधन के अधिकारी दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मगर अब सरकार के सामने असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
कार्रवाई पर आज फैसला लेगी सरकार
सरकार लारजी हादसे में कार्रवाई पर शनिवार को फैसला लेगी। मुख्य सचिव ने मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सोलन दौरे पर थे। अब शनिवार को फैसला होने की संभावना है।
इस बारे में सरकार को मंगलवार को हाईकोर्ट में भी जवाब देना है कि उसने दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की? सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव में जांच रिपोर्ट में दोषी बताए गए अधिकारियों पर संभावित कार्रवाई से लेकर रिपोर्ट की सिफारिशों पर उठाए जाने वाले कदमों का प्रारूप है।
मंडलायुक्त ने लारजी प्रोजेक्ट प्रबंधन, इसके थलौट डिविजन के साथ शिमला के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर पर भी सवाल उठाए हैं। जबकि सरकार ने अब तक केवल प्रोजेक्ट के दो इंजीनियर ही सस्पेंड किए थे। अब कई और दायरे में आ सकते हैं। मुख्य सचिव पी. मित्रा ने ये प्रस्ताव तैयार करने से पहले बिजली बोर्ड, ऊर्जा विभाग और गृह विभाग के अफसरों से भी चर्चा की है।