वे अपने बेटे के साथ भी नहीं चले। लेकिन बेटे के गुपचुप समर्थन की चर्चाएं खूब रहीं। दबाव में आकर उन्हें भाजपा के मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और अब उनकी भाजपा से छुट्टी होना भी लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में अनिल शर्मा को अपने पिता और पुत्र के साथ दोनों की कांग्रेस पार्टी का सहारा है। चर्चा यह भी है कि पुत्र और दादा के साथ-साथ कांग्रेस भी अनिल के स्वागत के लिए तैयार है। हालांकि अनिल शर्मा कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं करना चाहते।
उन्होंने अगला कदम कार्यकर्ताओं की राय पर छोड़ा है। बार-बार दल बदलने से कार्यकर्ताओं में गलत छवि जा रही है। इसलिए कार्यकर्ताओं की राय पर अगला कदम निर्भर करेगा। वहीं, मीडिया को दिए बयान में उन्होंने कहा है कि उन्हें भाजपा से निष्कासन की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। मीडिया से ही उन्हें जानकारी मिली है। अगर प्रदेशाध्यक्ष ने निष्कासन की बात कही है तो कुछ ना कुछ तो होगा।