मंडी हादसे में बहे छात्रों की तलाश में फिर से निराशा ही हाथ लगी है। सरकार के फैसले के बाद शनिवार सुबह ब्यास नदी का पानी रोककर सर्च ऑपरेशन चलाया गया लेकिन किसी छात्र का पता नहीं चला।
जानकारी के अनुसार सुबह ठीक सात बजे लारजी डैम के गेट बंद कर ब्यास नदी का पानी रोक दिया गया था। इसके बाद से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। मगर करीब साढ़े नौ बजे तक किसी छात्र का शव बरामद नहीं हो पाया।
इसके बाद लारजी डैम से फिर से पानी छोड़ दिया गया है। हालांकि, इसके बावजूद बचाव दल के जवान सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं।
चार किलोमीटर के दायरे में चला ऑपरेशन
नदी का पानी रोकने के बाद सर्च ऑपरेशन में लगे करीब साढ़े चार सौ जवान चार किलोमीटर के दायरे में चप्पा-चप्पा छान मारा। वहीं पर नदी के बीच बने तालाबों में नौसेना और एनडीआरएफ के गोताखोरों ने डुबकी लगाकर शवों की तलाश की।
शुक्रवार को भी थलौट से लेकर पंडोह डैम तक 15 किलोमीटर के दायरे में आईटीबीबपी, एसएसबी, एनडीआरएफ और हिमाचल पुलिस के करीब सात सौ जवानों और गोताखोंरों ने कड़ी मशक्कत की थी लेकिन बाद में निराशा ही हाथ लगी।
हादसे के सातवें दिन भी छात्रों के परिजन मंडी में डटे हुए हैं। कुछ को जहां अपने लाडलों के लौटने की उम्मीद है तो कई ऐसे भी हैं जो अब मान रहे हैं कि शायद अब उनके बेटे बेटियां कभी वापस नहीं आएंगे।
शुक्रवार को बैठक में लिया गया था फैसला
शुक्रवार को एक भी शव न मिलने की वजह से जिला प्रशासन और खोज एजेंसियों के अधिकारियों के साथ राज्य सरकार के मंत्री अनिल शर्मा और तेलंगाना के गृहमंत्री नरसिम्हा रेड्डी की अध्यक्षता में आपात बैठक की थी।
गृहमंत्री के साथ की गई इस बैठक में फैसला लिया गया कि शनिवार को हादसा स्थल से नीचे तीन मिलोमीटर तक ब्यास नदी का पानी सुखाकर तलाश की जाएगी। थलौट हादसे में लापता छोत्रों की तलाश के छठे दिन कोई भी शव न मिलने से सर्ज ऑपरेशन में लगी एजेंसियों को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा था।
उपायुक्त मंडी देवेश कुमार के नुसार इस अभियान में नौसेना के 20 गोताखोर, एनडीआरएफ के 120 जवान और 30 गोताखोर, नौ बोट, आईटीबीपी के 131 जवान और तीन राफट, एसएसबी के 102 जवान और दो राफट, हिमाचल पुलिस और थर्ड बटालियन के 150 जवान इस अभियान में शामिल किए गए हैं।