इस बरसात में आपदा के दौरान सरकारी दस्तावेजों में पूरी तरह से तबाह करीब एक दर्जन मकान जांच-पड़ताल में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मिले हैं। इसका खुलासा जिला प्रशासन की ओर से चलाए गए सत्यापन अभियान में हुआ है। फिलहाल अभी तक कुछ ही उपमंडलों से रिपोर्ट मिली है, अन्य की बाकी है। ऐसे में इस तरह के मामलों की संख्या और बढ़ सकती है। धरातल स्तर पर गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद प्रशासन ने आपदा राहत राशि रोक दी है।
अभियान के तहत आपदा से क्षतिग्रस्त हुए हर घर की मौके पर जाकर पड़ताल की जा रही है। पटवारी की रिपोर्ट को कानूनगो सत्यापित कर रहे हैं। मौके पर जांच पड़ताल के बाद ही रिपोर्ट बन रही है। इसी तरह 50 फीसदी मामलों में तहसीलदार और 25 फीसदी मामलों में एसडीएम खुद जांच पड़ताल कर रहे हैं। दुर्गम क्षेत्रों में यह वेरिफिकेशन कार्य वर्तमान में चला हुआ है। मौके पर जाकर प्रशासनिक टीम विस्तार से जांच पड़ताल कर रिपोर्ट बना रही है, ताकि वास्तव में आपदा प्रभावितों तक राहत पहुंच सके।
हो सकती है रिकवरी
कुछ उपमंडलों से मिली रिपोर्ट में करीब दर्जन तबाह हुए मकान सत्यापन में आंशिक तौर पर क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। इन मामलों में नियमानुसार श्रेणी के अनुसार ही राहत राशि दी जाएगी। अधिक राहत राशि जारी होने की सूरत पर इसकी रिकवरी की जा सकती है।
- अरिंदम चौधरी, उपायुक्त मंडी
पहले ये आंकड़े पहुंचे थे प्रशासन के पास
जिले में मानसून आपदा में 44 लोगों की मृत्यु को गई थी। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार 991 घर इस बरसात में आपदा के चलते पूरी तरह तबाह हुए हैं। जबकि करीब 2,305 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। करीब 2,400 गाोशालाएं क्षतिग्रस्त हुई थीं और करीब एक हजार पशुधन का नुकसान हुआ था। पूरी तरह से तबाह हुए मकानों के लिए प्रदेश सरकार ने सात लाख रुपये राहत राशि का प्रावधान किया है।
इसकी पहली किस्त तीन लाख रुपये जारी होनी है। मंडी के पड्डल मैदान में करीब 3,800 परिवारों को 31 करोड़ रुपये की राहत राशि जारी की थी। जबकि 3,400 प्रभावितों को बाद में 39 करोड़ रुपये राहत राशि दी जानी थी। शिकायतें मिलने के बाद प्रशासन ने वेरिफिकेशन शुरू की है।