चीन और पाकिस्तान की सीमा तक जाने वाले सामरिक महत्व के मनाली-लेह मार्ग को 12 महीने खुला रखने के लिए भारत सरकार ने कवायद तेज कर दी है। इस मार्ग पर रोहतांग टनल के अलावा चार और टनलें बनाने का फैसला लिया है। इसके लिए रक्षा बजट में प्रावधान किया गया है। रोहतांग टनल बना रहे बीआरओ को नोडल एजेंसी बनाया गया है। चार टनलों के लिए कुल 36 किलोमीटर लंबे दर्रे खोदे जाएंगे।
बीआरओ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एस थपलियाल ने मंगलवार को बताया कि बारालाचा में 11 किलोमीटर, लाचुुंगला में 14 किलोमीटर, तंगलंगला में 7 किलोमीटर और शिंकुला दर्रे में 4 किलोमीटर लंबी टनलें बनाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि बारालाचा में टनल के लिए फिजीबलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। हरी झंडी मिलने के बाद खुदाई का काम शुरू हो सकता है।
करीब 8.800 किलोमीटर लंबी निर्माणाधीन रोहतांग टनल के बारे में चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर डीएन भट्ट ने बताया कि अब दोनों छोर से मात्र 1130 मीटर खुदाई शेष है। पिछले साल रिकार्ड 2249 मीटर खुदाई की गई। इस साल फरवरी माह में 72 मीटर खुदाई हुई है।
नॉर्थ पोर्टल के मुहाने पर बर्फबारी होने के चलते काम बंद है। गर्मियों में काम शुरू होने से सात माह बाद सितंबर में रोहतांग टनल के दोनों छोर की खुदाई पूरी हो जाएगी। टनल के भीतरी कार्य करने के बाद इसे देश को समर्पित कर दिया जाएगा।
रोहतांग से भी लंबी होगी लाचुंगला टनल
निर्माणाधीन रोहतांग टनल 8.800 किलोमीटर लंबी है। जबकि लाचुुंगला टनल की लंबाई 14 किलोमीटर होगी। पांचों टनलों की कुल लंबाई 45 किलोमीटर लंबी होगी। किसी एक मार्ग पर 45 किलोमीटर लंबी टनलें देश में ही दुनिया में भी नहीं होने का दावा किया जा रहा है।