हिमाचल में बेरोजगारी भत्ते पर राजनीति गरमा गई है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राजीव बिंदल ने बेरोजगारी भत्ते को लेकर प्रदेश सरकार और कांग्रेस पार्टी पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने प्रेसवार्ता में कहा कि सरकार और कांग्रेस पार्टी के बीच में बेरोजगारी भत्ते को लेकर खूब ड्रामा चल रहा है। हिमाचल इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इसके चलते कांग्रेस फिर बेरोजगारों को ठगने का प्रयास कर रही है।
बिंदल ने कहा कि कांग्रेस का हर बड़ा नेता कह रहा है कि बेरोजगारी भत्ता पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र में किया गया वादा है, लेकिन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह सहित कई मंत्री प्रदेश की वित्तीय हालत को देखते हुए बेरोजगारी भत्ता नहीं दिए जाने की बात कर रहे हैं।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव आते ही प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू, जीएस बाली और विप्लव ठाकुर को अपने घोषणा पत्र की याद आई है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने अक्तूबर 2012 में अपना घोषणा पत्र जारी किया था।
ऐसे में साढ़े चार साल क्या कांग्रेस के नेता सत्ता का सुख भोग रहे थे और अब चुनाव को देखते हुए बेरोजगारों के हितैषी बन गए हैं। राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर कर रहे हैं कि बेरोजगार भत्ता नहीं दिया जा सकता है।
सरकार 2012 से दे बेरोजगारी भत्ता
बिंदल ने कहा कि आनन फानन में सरकार बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा कर सकती है, उन्होंने कहा कि यह भत्ता अभी से नहीं बल्कि 2012 से दिया जाना चाहिए, चूंकि कांग्रेस ने सत्ता में आने के लिए बेरोजगारी भत्ता देने का वायदा किया था। हर बेरोजगार के खाते में पांच साल का 60 हजार जमा होना चाहिए।
प्रदेश के बेरोजगारों की संख्या 12 लाख के करीब है। ऐसे में सरकार 7200 करोड़ रुपया बेरोजगारों के लिए जारी करे। उन्होंने कहा कि जहां तक कौशल विकास भत्ते की बात है वह केंद्र सरकार की योजना है। प्रदेश सरकार का इसमें कोई योगदान नहीं है। इस योजना के नाम पर हिमाचल में घोटाले हो रहे हैं।