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माइनस 15 डिग्री तापमान में सेना तैयार कर रहे हैं मेजर जनरल अतुल कौशिक

Sun, 28 Jan 2018 11:18 AM IST
हितेश शर्मा, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
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पचास डिग्री तापमान में रहने के बाद मेजर जनरल अतुल कौशिक ने पहाड़ों से भी दोस्ती कर ली है। करीब 14 हजार से ऊपर ऊंचाई वाले पहाड़ों में हाड़ कंपा देने वाली ठंड में मेजर जनरल ने न केवल स्वयं इस काबिल बनाया, बल्कि भारतीय सेना को भी हर तरह बर्फीले मौसम के मिजाज में ढाल दिया। 

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जम्मू-कश्मीर के हाई ऑल्टीट्यूड वारफेयर इंस्टीट्यूशन गुलमर्ग में बतौर हेड तैनात सिरमौरी बेटे मेजर जनरल कौशिक को अब भारतीय सेना विशिष्ट सेना मेडल से सम्मानित करेगी। 

राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद 2-3 माह में होने वाली भारतीय सेना की सेरेमनी में आर्मी चीफ उन्हें विशिष्ट सेना मेडल से अलंकृत करेंगे।हाई ऑल्टीट्यूड वारफेयर इंस्टीट्यूशन गुलमर्ग में मेजर जनरल सेना की क्षमताओं को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। 
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पिछले 10 माह में वे अपने संस्थान में बेहतरीन बदलाव लाए हैं। इससे न केवल सेना को पहाड़ों की लड़ाई में आसानी होगी, बल्कि नई-नई टेकनीक से दुश्मनों का खात्मा करने में भी जवान पूरी तरह सक्षम होंगे। 

कश्मीर में मेजर जनरल की यह चौथी पोस्टिंग है। इससे पहले वे राजस्थान के 50 डिग्री तापमान में रह चुके हैं। नेपाल, चेन्नई, सिक्किम, हैदराबाद, नागालैंड में मेजर जनरल ने सेवाएं दे चुके हैं।

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ये हैं मेजर जनरल अतुल कौशिक उपलब्धियां

27 अगस्त, 1983 को भारतीय सेना में बतौर लैफ्टिनेंट भर्ती हुए मेजर जनरल अतुल कौशिक को इससे पहले पांच अवार्ड मिले हैं। सेना मेडल के साथ बेहतरीन कार्यों के लिए सेना के प्रशस्ति पत्रों से भी नवाजा गया है।

2007 में भी मेजर जनरल अतुल कौशिक को असाधारण कार्यों के लिए सेना पदक मिला था। 2005 में इमरजेंसी में वे दुश्मनों की गोली से चोटिल भी हुए। भारतीय सेना में रहने के दौरान मेजर जनरल अतुल कौशिक ने कई असाधारण कार्य किए हैं।

मेजर जनरल की पहली पोस्टिंग चौथी गोरखा रेजिमेंट में हुई थी। इसके बाद नॉर्थ और ईस्ट सिक्किम में पोस्टिंग के साथ अतुल कौशिक नागालैंड के जंगलों में भी काम कर चुके हैं। 

विशिष्ट सेना मेडल के लिए जताई खुशी
अमर उजाला से बातचीत में मेजर जनरल अतुल कौशिक ने विशिष्ट सेना मेडल के लिए खुशी जताई। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना को हाई ऑल्टीट्यूड वारफेयर में हर तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। उन्हें ऊंचे ऊंचे पर्वतों और पहाड़ों के मौसम में ढालने तथा युद्ध का प्रशिक्षण दिया जाता है। सिखाया जाता है कि मौसम के मिजाज से कैसे दोस्ती की जाती है।
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