मेजर अंशुल को अप्रैल 2025 में असम के दीमा हसाओ क्षेत्र में चलाए गए एक अभियान के लिए चुना गया था। इस अभियान में उन्होंने असाधारण साहस और नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया। खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए इस अभियान में उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ हुई थी। मेजर बाल्टू ने बहादुरी से कार्रवाई करते हुए एक उग्रवादी को मार गिराया। उनकी इस कार्रवाई से अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उनकी वीरता और उत्कृष्ट नेतृत्व को देखते हुए उन्हें शौर्य चक्र के लिए चुना गया था। उनके सम्मान से पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है। उनके परिवार के सदस्य इस गौरवपूर्ण क्षण के साक्षी बने। यह सम्मान देश के प्रति उनके समर्पण और बलिदान का प्रतीक है।