इस पूरी रात चले अभियान के दौरान फील्ड स्टाफ की सतर्कता से कुल 10 वाहनों को रंगे हाथ पकड़ा गया। इनमें से दो वाहनों को भरवाईं रेंज के स्टाफ ने पकड़ा, जो देहरा डिवीजन की ओर से आ रहे थे। वहीं, अंब रेंज में कुल आठ वाहन पकड़े गए, जिनमें से सात वाहन ऊना डिवीजन और एक वाहन हमीरपुर डिवीजन से संबंधित था। चेकिंग के दौरान किसी भी वाहन चालक के पास वन उपज ले जाने का कोई वैध परमिट या अनुमति पत्र नहीं पाया गया। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इन सभी वाहनों में प्रतिबंधित चौड़ी पत्ती वाली प्रजातियों की लकड़ियां लदी हुई थीं। वन विभाग ने बिना परमिट के चल रहे इन सभी 10 वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया है।
इस गंभीर मामले में भारतीय वन अधिनियम, 1927 की विभिन्न धाराओं के तहत वन अपराध के मामले दर्ज कर लिए गए हैं। विभाग की ओर से अब इस मामले की गहन जांच की जा रही है ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि यह अवैध वन उपज निजी भूमि से काटी गई है या सरकारी वन भूमि से। लकड़ी के मुख्य स्रोत और इसमें शामिल अन्य लोगों का पता लगाने के लिए आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई जारी है। इस सफल और त्वरित सर्च ऑपरेशन को अंजाम देने में वन विभाग के फील्ड स्टाफ ने अत्यंत सराहनीय भूमिका निभाई। इस साहसिक कार्रवाई में रंजीत सिंह, संजीव कुमार, ऊषा ठाकुर, विक्रांत, नरेंद्र, साहिल, नरेश, विकास और शक्ति चंद सहित अन्य कर्मचारियों ने मुख्य रूप से भाग लिया।