मोहनदास कर्मचंद गांधी के पितामह उत्तमचन्द गांधी यानी ओता गांधी ने दो शादियां की थीं। उनकी छह संतानें हुईं। इन संतानों में एक कर्मचंद गांधी, गांधीजी के पिता थे। उन्हें प्यार से कबा गांधी कहा जाता था। गांधीजी के पिता कर्मचंद गांधी ने भी चार शादियां की। कर्मचंद गांधी का पहला विवाह चौदह साल की उम्र में हुआ था। इस विवाह से उनकी दो बेटियां हुईं।
कबा गांधी जब पच्चीस साल के हुए तो उनकी पहली पत्नी चल बसीं। कबा गांधी ने दूसरा विवाह किया। तब वह अपने पिता की जगह पोरबंदर के दीवान बने थे। इसके बाद उनका तीसरा विवाह हुआ। और तीसरी पत्नी के जीवित रहते कबा गांधी ने चौथा विवाह किया। गांधीजी के प्रारंभिक जीवन और उनके पूर्वजों पर शोध करने वाले प्रभुदास गांधी ने जीवन प्रभात नामक किताब लिखी है।
प्रभुदास गांधी को महात्मा की बड़ी बहन ने बताया कि उनके पिता की चार स्त्रियां थीं। उनकी मां पुतलीबा दात्राणा गांव की थी। उनकी मां ने उन्हें बताया कि कबा गांधी की तीसरी पत्नी अपाहिज थीं। उनके पैर वात रोग से जकड़ गए थे। अपने आप उठ-बैठ नहीं पाती थीं। इसलिए पिताजी उनसे कहा करते थे कि तू कह दे तो वंश चलाने के लिए नई ले आऊं।
वह कह देती थी कि जीवित पर कोई देता हो तो भले ले आओ। होते-होते एक दिन पिताजी ने उनसे कहा तुम ठीक-ठीक बताओ। अगर तुम कहोगी तो आज ही आ जाएगी। स्वीकृति मिलते ही सचमुच हाथ के हाथ मेरे पिताजी की शादी हो गई। विवाह के समय पुतलीबा की आयु प्रायः तेरह वर्ष की होगी।