हिमाचल के जिला सिरमौर के समूचे गिरिपार क्षेत्र में धार्मिक आस्था के प्रतीक महासू देवता का स्नान मेला शुरू हो गया है। शुभ मुहूर्त में देवता की पालकियां एवं छड़ियों का श्रृंगार कर उन्हें भंडारे से बाहर निकालकर देवालय में रख दिया गया है।
शुक्रवार को सिद्धि विनायक गणेश चतुर्थी के दिन देव पालकियों एवं प्रतिमाओं को स्नान के लिए जलधाराओं पर ले जाकर स्नान करवाया गया। जबकि शनिवार को विधिवत पुन: देव पालकियों एवं छड़ियों को अपने यथा स्थान भंडारे में स्थापित कर दिया जाएगा।
इन तीन दिनों में देवता की पूजा अर्चना की जाएगी। गिरिपार क्षेत्र के शिल्ला, शमाह, टिटियाणा, कोटी उतरऊ, पशमी, बंशवा, कंडियारी, ऐराना, कोटी, द्राविल, भटवाड़, लाणी बाहराड़ भोहड़, मोहराड़, मशवाड़ सहित टौंस नदी पार के जौनसार इलाका एवं महासू तीर्थ हनोल में स्नान मेला शुरू हो गया है। इस स्नान मेला को स्थानीय भाषा में पांजवी कहा जाता है।
कोटी मंदिर के पुजारी मुंशीराम शर्मा, द्रविल के रामभज शर्मा, मोहराड़ के धनीराम शर्मा, मशवाड़ के बीजाराम एवं देव कारिंदे कंडियारी निवासी जातीराम नेगी कांडी निवासी धर्म सिंह नेगी का कहना है कि इस देव परंपरा को वह अपनी शान एवं शौकत के साथ हर वर्ष निभाते आ रहे हैं। देवता के इस परंपरा को निभाने के लिए अलग-अलग नाम से तैनातियां की हैं।
जैसे पुजारी, भंडार, माली, ठाणी ढड़वारी देयाल, वास्तिया आदि यह सभी लोग श्रद्धा भाव से अपनी ड्यूटी निभाते हैं। तीन दिन तक चलने वाले इस पर्व में देयाल द्वारा महासू देवता का प्रसिद्ध गायन बीरसू भी गाया जाएगा।