मंगलवार को डुबछोद महापर्व का 50वीं स्वर्ण जयंती समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान विश्व शांति के लिए महाकाल की विधिवत पूजा अर्चना की गई। बौद्ध भिक्षुओं ने छम नृत्य और तांडव कर पूजा को संपूर्ण किया।
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के पूह खंड के मूरंग गांव में मंगलवार को डुबछोद महापर्व का 50वीं स्वर्ण जयंती समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान विश्व शांति के लिए महाकाल की विधिवत पूजा अर्चना की गई। बौद्ध भिक्षुओं ने छम नृत्य और तांडव कर पूजा को संपूर्ण किया। स्थानीय ग्रामीणों ने भी पारंपरिक नृत्य में बढ़ चढ़कर भागीदारी की। महापर्व का शुभारंभ मूरंग (स्थानीय बोली में गिनम) में स्थित मठ संगछेन थरपा छोलिंग से हुआ। दोडग छोलिंग विहार में दशकों से महाकाल देव की पूजा भूमि अभिषेक के माध्यम से की गई।
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चार दिन की साधना के बाद अंतिम दिन इष्ट देवता ओर्मिक शु को विराजमान कर और लामा जोमो संघ की उपस्थिति में महापर्व का समापन विधिवत रूप से हुआ। महापर्व का आयोजन छोएगोन रिपोंछे तंजिन छोएकी ज्ञाछो की अध्यक्षता में किया गया। इस मौके पर प्रसार भारती के वित्त सदस्य धर्मपाल नेगी बतौर मुख्यातिथि मौजूद रहे। इस अवसर पर धर्म गुरु छोइगेंन रिपोंछे ने कहा कि इस महापर्व को विश्व शांति के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि बौद्ध धर्म शांति का प्रतीक है। इस मौके पर मूरंग पंचायत प्रधान अनूप नेगी, उपप्रधान ज्ञान भगत और मंदिर महोतमी हंस राज सहित कई अन्य मौजूद रहे।