हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में चिकित्सा खंड भवारना में एल्बेंडाजोल दवाई खिलाने के दौरान बच्ची की मौत मामले में विभागीय टीम ने जांच पूरी कर ली है। कांगड़ा के जिला स्वास्थ्य अधिकारी और खंड चिकित्सा अधिकारी की जांच टीम ने पाया है कि बच्ची की मौत के लिए न तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की गलती थी और न दवाई में कोई खराबी। दवाई पिलाते वक्त हुई उल्टी का कुछ भाग श्वास नली से फेफड़ों में चला गया था। इस वजह से बच्ची की तबीयत बिगड़ी। बाद में उसकी मौत हो गई। वहीं, परिजनों ने मृतक बच्ची का पोस्टमार्टम करवाने से भी मना कर दिया है।
जांच टीम में शामिल जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विक्रम कटोच ने बताया कि सोमवार को पूरे प्रदेश में हर आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों में बच्चों के पेट के कीड़े मारने की दवाई (एल्बेंडाजोल) खिलाई गई थी। इसी कड़ी में चंजेहड़ गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में भी दवाई खिलाई जा रही थी। इस दौरान बच्ची दवा न पीने की जिद करने लगी। इसके बाद बच्ची की मां ने भी उसे दवा पिलाने का प्रयास किया। दवाई पीने के दौरान बच्ची ने उल्टी कर दी। इसके बाद बच्ची को सिविल अस्पताल भवारना में उपचार के लिए ले जाया गया।
वहां बाल रोग विशेषज्ञ और मेडिकल स्पेशलिस्ट ने करीब डेढ़ घंटे बच्ची की जान बचाने के लिए कोशिश की, मगर दुर्भाग्यवश बच्ची की जान नहीं बचाई जा सकी। डॉ. कटोच ने बताया कि उल्टी का कुछ भाग फेफड़ों में चला गया था। इसके कारण बच्ची की तबीयत बिगड़ी थी। उन्होंने बताया कि मामले की जांच पूरी कर ली गई है और रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य अधिकारी को सौंप दी जाएगी। वहीं, मंगलवार को नम आंखों से मृतक बच्ची का अंतिम संस्कार उसके परिजनों ने कर दिया। बच्ची का पिता कुंदन गुड़गांव में किसी निजी कंपनी में नौकरी करता है और सोमवार देर रात ही घर पहुंचा था। वहीं, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने बताया कि परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम करवाने से मना कर दिया था।