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लग्जरी गाडिय़ां नहीं रही, बीमा कंपनियों के फायदे का सौदा

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कंपनियों के अनुसार 30 लाख से लेकर 1.5-2.0 करोड़ रुपये तक की कीमत वाली गाडिय़ों की रिपेयरिंग लागत ज्यादा होने के कारण क्लेम काफी महंगा होता है। जिसे देखते हुए लग्जरी गाडिय़ों के प्रीमियम में 5 फीसदी तक बढ़ोतरी की जा चुकी है। कंपनियों के अनुसार बढ़ते क्लेम मामलों को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
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महंगा है रिपेयरिंग कराना


एंट्री लेवल की गाडिय़ों से लेकर अल्ट्रा प्रीमियम वाली गाडिय़ों के केवल शीशे बदले में 70 हजार से लेकर 8-10 लाख रुपये तक खर्च आता है। ऐसे में एक बार क्लेम आने पर बीमा कंपनियों को भारी राशि चुकानी पड़ती है। जिसके वजह से एक समय 50 फीसदी तक डिस्काउंट देने वाली कंपनियां अब धीरे-धीरे डिस्काउंट भी कम कर रही हैं।
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क्यों बदला पैटर्न

बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के चीफ टेक्नीकल ऑफीसर विजय कुमार ने अमर उजाला को बताया कि लग्जरी कार सेगमेंट में बजाज आलियांज की हिस्सेदारी 50 फीसदी के करीब है। पिछले 6 महीने में इस सेगमेंट में 52 फीसदी तक क्लेम बढ़ा है। बढ़ती दुर्घटनाओं और महंगी रिपेयरिंग लागत के कारण इंडस्ट्री ने प्रीमियम में 5 फीसदी तक बढ़ोतरी की है।
भारती अक्सा जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीईओ  और एमडी अमरनाथ अनंथनारायाण के अनुसार लग्जरी गाडिय़ों में ज्यादातर कल पुर्जे आयात किए जाते हैं। जिसकी वजह से उनकी रिपेयरिंग लागत भारत में बनने वाली गाडिय़ों की तुलना में ज्यादा होती है। जिसका असर क्लेम पर भी पड़ता है।
आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के चीफ (अंडरराइटिंग एंड क्लेम) संजय दत्ता के अनुसार हाल के दिनों में लग्जरी गाडिय़ों पर क्लेम बढ़े हैं।
इंडस्ट्री के अनुसार क्लेम के मामले कम होने के कारण बीमा नियामक इरडा ने साल 2009 में अपनी एक रिपोर्ट में लग्जरी गाडिय़ों के सेगमेंट को साधारण बीमा कंपनियों के लिए फायदे का कारोबार कहा था। कंपनियों के अनुसार हालांकि अब स्थिति बदल गई है।

कंपनियों के अनुसार पहले लग्जरी गाडिय़ां लोग शौक में चलाते थे। साथ ही ज्यादातर शॉफर गाडिय़ां चलाते थे। अब एंट्री सेगमेंट की कीमत कम होने के कारण युवा भी इन गाडिय़ों को तेजी से खरीद रहे हैं। साथ ही दूसरी -तीसरी पीढ़ी के कारोबारियों की संख्या बढऩे के कारण ऐसे वाहनों की बिक्री में तेजी आई है। ज्यादातर दुर्घटनाएं युवाओं द्वारा गाडिय़ां चलाने से हुई हैं।
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