नशा तस्करी के लिए अपराधी कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। राजधानी शिमला में पकड़े गए एक करोड़ के (लाइसर्जिक एसिड डाइथाइलमाइड) एलएसडी नशा तस्करी के मामले में भी ऐसा ही कुछ सामने आया है। पुलिस की जांच में पता चला है कि आरोपियों ने एलएसडी को किताब में छिपाकर शिमला पहुंचाया था। पुलिस की छानबीन में नशे की सप्लाई के तार गोवा से जुड़ रहे हैं। पुलिस के मुताबिक मुख्य सप्लायर नविएल हैरिसन से पूछताछ और मामले में तकनीकी पहलुओं को खंगालने के बाद पता चला है कि गोवा से राजस्थान और दिल्ली से होकर एनलएसडी की तस्करी होती है। यहां से शिमला इस नशे को लाया गया था। पुलिस मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। इसके साथ ही बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। नशे की एक डोज की कीमत उसकी गुणवत्ता के हिसाब से दस हजार रुपये प्रति स्टि्रप तक हो सकती है। इसमें लाखों, करोड़ों रुपये के मुनाफे की वजह से ही इसकी तस्करी में बड़े नेटवर्क का हाथ होता है।