15 अगस्त, 1947 को भारत के अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटन शिमला में थे कि नहीं? इस तथ्य को सही-सही जानने के लिए राज्य भाषा एवं संस्कृ ति निदेशालय ने जांच बैठा दी है।
स्वतंत्रता सेनानियों पर छपी किताब में वायसराय के शिमला में होने की बात है। इसमें उल्लेख है कि वायसराय लार्ड माउंटबेटल इस दिन शिमला के माल रोड पर घूमे थे, मगर कई तरह के सरकारी और दूसरे रिकॉर्डों में लॉर्ड माउंटबेटन के दिल्ली में होने की बात है।
अंग्रेजों के अधीन रहे हमारे देश के आखिरी अंग्रेज शासक वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन 15 अगस्त, 1947 को शिमला में थे या फिर दिल्ली में थे। इस पर हिमाचल में दो दशकों से भ्रम की स्थिति है।
प्रदेश भाषा एवं संस्कृति विभाग की वर्ष 1992 में प्रकाशित पुस्तक में आज तक यही पढ़ाया जा रहा है कि इस दिन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन शिमला के माल रोड पर घूम रहे थे।
उधर, बीबीसी हिंदी के अनुसार इस दिन लॉर्ड माउंटबेटन ने इंडिया गेट के पास प्रिंसेज गार्डन में एक सभा को संबोधित किया। इस तथ्य को ‘अमर उजाला’ ने अपने 15 अगस्त, 2017 के अंक में भी प्रमुखता से उठाया था।
राज्य भाषा एवं संस्कृति विभाग शिमला ने साल 1992 में अपनी पुस्तक ‘हिमाचल प्रदेश में स्वतंत्रता संग्राम का संक्षिप्त इतिहास’ की कुल 7500 प्रतियां प्रकाशित की थीं।
इसके पृष्ठ 176 के दूसरे पैराग्राफ में उल्लेख है- 15 अगस्त, 1947 को अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए... भारत के अंतिम ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबैटन, उनकी पत्नी और पुत्री इस अवसर पर माल रोड पर स्वतंत्र रूप से घूमते रहे और लोगों ने उनका स्वागत किया।
कुछ सरकारी रिकॉर्डों और बीबीसी हिंदी में ऑनलाइन यह जानकारी उपलब्ध है कि 15 अगस्त, 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने अपने दफ्तर में काम किया।
दोपहर में नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल की सूची सौंपी और बाद में इंडिया गेट के पास प्रिंसेज गार्डेन में एक सभा को संबोधित किया। इस खबर के छपने के बाद राज्य भाषा एवं संस्कृति निदेशालय भी गंभीर हो गया है।
भाषा एवं संस्कृति विभाग की निदेशक शशि ठाकुर ने कहा है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ये निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे इस तथ्य का पता लगाएं कि वायसराय 15 अगस्त, 1947 को शिमला में थे या दिल्ली में थे। जो भी तथ्य सामने आएगा, उसी के अनुसार अगली कार्रवाई होगी।