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Lok Sabha Election: हिमाचल में लोकसभा चुनाव- छह विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव एक साथ, यहां पढ़ें पूरा शेड्यूल

Sat, 16 Mar 2024 09:43 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला

सार

 हिमाचल प्रदेश की कुल चार लोकसभा सीटों के लिए सातवें चरण में चुनाव होगा। इसके साथ ही कांग्रेस के बागी छह विधायकों के अयोग्य घोषित किए जाने से खाली हुई विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव भी होगा। 
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लोकसभा चुनाव 2024 हिमाचल प्रदेश - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय चुनाव आयोग ने 18वीं लोकसभा के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। हिमाचल प्रदेश में लोकसभा की चार सीटों के लिए अंतिम एवं सातवें चरण में 1 जून को मतदान होगा। इसी दिन छह विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव भी करवाया जाएगा। ये छह विधानसभा क्षेत्र वही हैं, जहां से कांग्रेस ने छह बागी विधायकों को अयोग्य घोषित किया है। 4 जून को नतीजे घोषित हो जाएंगे। प्रदेश में 7 मई को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख 14 मई तय की गई है। नामांकन पत्रों की छंटनी 15 मई को होगी। 17 मई को नाम वापस लिए जा सकेंगे। छह विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव के लिए भी यही प्रक्रिया रहेगी। शनिवार को राज्य मुख्य चुनाव अधिकारी मनीष गर्ग ने प्रेस वार्ता के दौरान चुनाव कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चुनाव का एलान होते ही प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है।

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कांग्रेस के छह अयोग्य विधायक भी लड़ सकेंगे चुनाव : गर्ग
 मुख्य चुनाव अधिकारी मनीष गर्ग ने बताया कि कांग्रेस के अयोग्य घोषित छह विधायक भी उपचुनाव लड़ सकेंगे। चुनाव लड़ने के लिए अयोग्यता के तहत निर्वाचन आयोग ने जो मापदंड निर्धारित किए हैं, उनमें ये अयोग्य विधायक नहीं आते। उन्होंने बताया कि धर्मशाला में 83,718, लाहौल-स्पीति में 25,724, सुजानपुर में 76,830, बड़सर 88,432, गगरेट में 84,887 और कुटलैहड़ में 87,857 मतदाता उपचुनाव में वोट डालेंगे हैं। 
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लोकसभा चुनावों में कुल 56,38,422 मतदाता वोट डालेंगे। इनमें 55,72,705 सामान्य, 65,682 सेवा अर्हता और 35 तृतीय लिंग मतदाता शामिल हैं। संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात होगा। प्रत्याशी अपने संसदीय क्षेत्र में 95 लाख तक खर्च कर सकेंगे। राज्य मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि साल 2019 में लोकसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश की मत प्रतिशतता 72.42 फीसदी थी, विधानसभा चुनावों में मत प्रतिशतता 76 फीसदी थी। इस बार लोकसभा चुनाव में मत प्रतिशतता 76 फीसदी पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने प्रदेश के लोगों से चुनाव में बढ़चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया है।

लोकसभा चुनाव में...
56,38,422 मतदाता करेंगे मतदान
1,38,918 मतदाता 18 से 19 साल के
10,40,756 मतदाता 20 से 29 साल के
मतदान केंद्र 7,990
मतदान कर्मी 50,000
संवेदनशील केंद्र 425

 

छह अयोग्य घोषित विधायकों की याचिका की सुनवाई कल, सुप्रीम कोर्ट पर नजरें
छह अयोग्य घोषित कांग्रेस विधायकों सुधीर शर्मा, राजेंद्र राणा, रवि ठाकुर, इंद्रदत्त लखनपाल, देवेंद्र कुमार भुट्टो और चैतन्य शर्मा की याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को है, जिस पर सबकी नजरें हैं। एक ओर जहां इन छह क्षेत्रों में विधानसभा उपचुनाव घोषित किए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ अयोग्य घोषित विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की है। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने व्हिप जारी होने के बावजूद वित्त विधेयक पारित करते वक्त सदन में उपस्थित न होने पर इन विधायकों पर कार्रवाई की थी। 

बहुमत के लिए उपचुनाव में भाजपा को छह, कांग्रेस को चाहिए एक सीट
बहुमत के लिए उपचुनाव में भाजपा को सभी छह सीटें जीतने की जरूरत होगी। केवल तभी संख्या बल 31 हो पाएगा, क्योंकि वर्तमान में भाजपा के विधायक 25 हैं। 3 निर्दलीय विधायक भी भाजपा का साथ देंगे तो भाजपा के पास 34 विधायक हो जाएंगे। ऐसे में विधानसभा में कांग्रेस के विधायक बेशक 34 होंगे, मगर विधानसभा अध्यक्ष का वोट केवल टाई होने की स्थिति में गिने जाने पर कांग्रेस विधायकों का संख्या बल 33 रह जाएगा। वहीं, कांग्रेस छह में से एक सीट भी जीतती है तो इसका संख्या बल 35 हो जाएगा और यह बहुमत में ही रहेगी। ऐसे में उपचुनाव में कांग्रेस के बजाय भाजपा पर ज्यादा सीटें जीतने की चुनौती रहेगी।

शिमला संसदीय सीट
शिमला संसदीय सीट का ज्यादातर क्षेत्र पहाड़ी है। 1977 में पहली बार भारतीय लोक दल के बालक राम यहां से सांसद चुने गए। इसके बाद 1980 से 1998 तक कांग्रेस के कृष्ण दत्त सुल्तानपुरी ने लगातार छह बार जीत दर्ज की। उनके सामने कोई भी धुरंधर टिक नहीं पाया। इसके बाद धनी राम शांडिल ने 1999 में हिमाचल विकास कांग्रेस से चुनाव लड़कर कांग्रेस के किले में सेंधमारी की। 2004 में हुए चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर फिर जीत दर्ज की। 2009 से अब तक हुए तीन चुनावों में दो बार वीरेंद्र कश्यप और एक बार सुरेश कश्यप ने सीट जीती और भाजपा की हैट्रिक लगाई। पिछले तीन चुनावों से भाजपा की जीत का अंतर हर बार बढ़ा है। 2014 में भाजपा करीब 84 हजार मतों से जीती। 2019 में यह अंतर 3 लाख 27 हजार हो गया। शिमला संसदीय क्षेत्र में अर्की, नालागढ़, दून, सोलन, कसौली, पच्छाद, नाहन, श्रीरेणुकाजी, पांवटा साहिब, शिलाई, चौपाल, ठियोग, कसुम्पटी, शिमला शहरी, शिमला ग्रामीण, जुब्बल-कोटखाई और रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

हमीरपुर संसदीय सीट
राजनीतिक धुरंधरों की भरमार के चलते एक बार फिर हमीरपुर संसदीय सीट हॉट मानी जा रही है। बेशक इस सीट पर कांग्रेस की जीत से दूरी ढाई दशक की हो गई है, लेकिन प्रदेश में अब सत्तासीन कांग्रेस सरकार के सीएम सुक्खू ने मुकाबले को रोचक बना दिया है।  सुक्खू नादौन के रहने वाले हैं। नादौन से ही ताल्लुक रखने वाले कांग्रेसी नेता स्व. नारायण चंद पराशर तीन दफा सांसद रहे हैं। उनके बाद कांग्रेस टिकट पर ऊना जिले से मेजर जनरल विक्रम सिंह ने एक बार प्रेम कुमार धूमल को पराजित किया था। बीते 16 लोकसभा चुनावों में भाजपा को 10 बार और कांग्रेस को 5 बार जीत मिली है, जबकि एक दफा जनता पार्टी ने जीत हासिल की है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के परिवार का इस सीट पर वर्ष 2007 से कब्जा रहा है। वर्ष 2007 में इस सीट पर धूमल विजयी हुए थे। इसके बाद से यह सीट धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर के पास है।

अनुराग इस सीट पर पहले ऐसे प्रत्याशी हैं, जिन्होंने जीत का चौका लगाया है। इस सीट से तीन बार जीत हासिल करने वाले सुरेश चंदेल को लोकसभा में एक विवाद के चलते वर्ष 2007 में सीट गंवानी पड़ी थी। उपचुनाव में प्रेम कुमार धूमल ने इस सीट से जीत हासिल की। लेकिन, उनके मुख्यमंत्री बनने से यहां दोबारा उपचुनाव हुआ और अनुराग ठाकुर विजयी हुए। इस जीत के बाद से लगातार अनुराग ठाकुर लोकसभा में हमीरपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।  हमीरपुर संसदीय क्षेत्र पांच जिलों के विधानसभा क्षेत्रों को जोड़कर बना है। इसमें धर्मपुर, भोरंज, सुजानपुर, हमीरपुर, नादौन, बड़सर, बिलासपुर, घुमारवीं, झंडूता, श्री नयनादेवी, ऊना, गगरेट, चिंतपूर्णी, हरोली, कुटलैहड़, देहरा और जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।

कांगड़ा संसदीय सीट
कांगड़ा सीट से पिछले नौ चुनावों में सात बार भाजपा जीती है। पिछले तीन चुनाव भाजपा ने लगातार जीते हैं।  शुरुआत में यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। ऐसे में भाजपा के चौके को रोकने और फिर वर्चस्व बनाने के लिए कांग्रेस खूब माथापच्ची कर रही है। धर्मशाला से कांग्रेस के अयोग्य घोषित विधायक सुधीर शर्मा की बगावत के बाद यह सीट हॉट हो गई है। सदीय क्षेत्र में आने वाले कांगड़ा जिले के 13 विस क्षेत्रों में से 10 में कांग्रेस के विधायक हैं। इनमें एक धर्मशाला से अयोग्य घोषित विधायक सुधीर शर्मा हैं। चंबा के चार विधानसभा क्षेत्रों में से दो में कांग्रेस विधायक हैं। कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र में भाजपा के 5 विधायक हैं। चंबा के भरमौर से भाजपा विधायक का क्षेत्र मंडी और कांगड़ा जिले के जसवां परागपुर से भाजपा विधायक का क्षेत्र हमीरपुर में आता है। देहरा से निर्दलीय विधायक हैं। 

मंडी संसदीय क्षेत्र में आते हैं छह जिलों के 17 विस क्षेत्र
प्रदेश में वर्तमान में लोकसभा की चार सीटें हैं। इनमें से तीन भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस काबिज है। प्रदेश के छह जिलों मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, किन्नौर, शिमला और चंबा के 17 विधानसभा क्षेत्र मंडी संसदीय सीट के तहत आते हैं। इसमें धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर मंडी जिले के शेष नौ विधानसभा क्षेत्र, कुल्लू के सभी चार विस क्षेत्र, किन्नौर, लाहौल-स्पीति सहित शिमला जिला का रामपुर और चंबा का भरमौर विधानसभा क्षेत्र शामिल है। वर्तमान में इन 17 विधानसभा क्षेत्रों में से 12 में भाजपा के और चार में कांग्रेस के विधायक हैं। लाहौल-स्पीति के विधायक रवि ठाकुर को अयोग्य घोषित किया गया है। रवि ठाकुर ने अयोग्य घोषित करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है। क्षेत्रफल के हिसाब से प्रदेश की सबसे बड़ी इस सीट से जयराम ठाकुर, वीरभद्र सिंह, पंडित सुखराम, प्रतिभा सिंह, महेश्वर   सिंह और कौल सिंह ठाकुर को हार का मुंह भी   देखना पड़ा है। वर्ष 2019 के आम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप ने यहां से सबसे अधिक अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी आश्रय शर्मा को हराया था। इसके बाद रामस्वरूप के देहांत के बाद 2021  में  उपचुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस की प्रतिभा सिंह सांसद चुनी गईं। 
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17 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की जीत की चाबी महिलाओं के हाथ
लोकसभा चुनाव में इस बार प्रदेश के 17 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की जीत की चाबी महिलाओं के हाथ में रहेगी। संसदीय क्षेत्र हमीरपुर के आठ, मंडी के छह, कांगड़ा के दो और शिमला संसदीय क्षेत्र के एक विधानसभा क्षेत्र में पुरुषों के मुकाबले महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है। प्रदेश के 11 ऐसे विधानसभा क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं से मात्र 50 से 500 तक ही अधिक है। चारों संसदीय क्षेत्रों में 17-17 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के कुल मतदाताओं की बात करें तो राज्य में इनकी संख्या 5568171 है। इनमें महिला मतदाताओं की संख्या 2755160 है और पुरुष मतदाता 2812976 हैं।
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