चुनावों के दौरान पुलिस की ओर से नोडल अधिकारी व एडीजी कानून व्यवस्था एसबी नेगी ने बताया कि सुरक्षा प्लान तैयार किया गया है। केंद्रीय पुलिस बलों की 42 कंपनियां केंद्रीय चुनाव आयोग से मांगी गई हैं।
सभी 99 स्टेट बैरियरों को सीसीटीवी से लैस किया जाएगा। प्रदेश के 773 पोलिंग बूथों पर वेब कास्टिंग की जाएगी। चुनाव में साढ़े बारह हजार पुलिस कर्मी व साढ़े छह हजार होमगार्ड जवान तैनात किए जाएंगे।
चुनाव के दौरान प्रत्याशी 70 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे। जमानत राशि को आयोग ने 25 हजार रुपये निर्धारित किया है। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के प्रत्याशियों के लिए यह राशि आधी होगी।
रात दस बजे से सुबह छह बजे तक लाउड स्पीकरों का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। विज्ञापन व बैनर के लिए प्लास्टिक शीट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। हर चुनाव अधिकारी के कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है, जहां जानकारी लेने के साथ ही शिकायत भी दर्ज कराई जा सकेगी।
खर्च निगरानी के लिए मैकेनिज्म तैयार किया गया है। खर्च निगरानी के लिए 206 फ्लाइंग स्क्वाएड के अलावा 70 वीडियो सर्विलेंस टीम और 13 एमसीएमसी टीमें गठित की गई हैं।
चुनावी प्रक्रिया के दौरान मंत्री या नेता किसी भी रूप में किसी तरह की वित्तीय मंजूरी या आश्वासन नहीं दे सकेंगे। इसके अलावा किसी तरह की परियोजनाओं व स्कीमों के लिए आधारशिला, सड़काें व पीने के पानी की सुविधाएं देने का भी एलान नहीं कर सकेंगे।इस दौरान शासन किसी भी सरकारी उपक्रम में नियुक्ति भी नहीं कर सकेगा।
हिमाचल में 19 मई को मतदान
हिमाचल में लोकसभा की चारों सीटों के लिए अंतिम एवं सातवें चरण में 19 मई को मतदान होगा। प्रदेश में 22 अप्रैल को चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाएगी। मतदान के चार दिन बाद ही 23 मई को नतीजे घोषित हो जाएंगे।
हिमाचल में करीब ढाई महीने तक कोई नया काम नहीं होगा। चुनाव आचार संहिता के चलते सरकार प्रदेश में पुराने कार्यों पर ही फोकस करेगी। प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और बिजली जैसे कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इन्हें और बेहतर बनाने के लिए सरकार समीक्षा बैठकें करेगी। सरकार ने बीते वर्ष कई जनहित योजनाएं शुरू की हैं।
इनमें देवभूमि दर्शन योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक स्थलों की यात्रा करवाना, मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना, अटल वर्दी योजना, स्वावलंबन आदि ऐसी योजनाएं हैं, जो शुरू की गई हैं, लेकिन इनको और बेहतर करने के लिए समीक्षा होगी। ढाई महीने तक कोई भी नया काम नहीं होना है। प्रदेश में आचार संहिता लागू रहने तक रूटीन के कार्य होंगे। ऐसे में अफसर के पास पुराने कार्यों की समीक्षा करने में समय रहेगा।