इस हादसे की पहली बरसी पर अभिभावकों व गांववासियों ने उन मासूम बच्चों की याद में घटनास्थल पर बनाए गए मंदिर में इकट्ठे होकर दिवंगत बच्चों की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही इस हादसे की उच्च स्तरीय जांच करवाने की गुहार को लेकर सरकार व प्रशासन के लचर रवैये के खिलाफ रोष भी जताया।
24 बच्चों समेत 28 की गई थी जान
इन बच्चों के अभिभावकों विक्रम सिंह, कर्ण सिंह, हंस राज, सीमा देवी, राजेश, रघुवीर, रिंकू गुलेरिया, सोमा, मनोज, लक्की, अश्वनी, अनिता, सिमरन व अन्य गांववासियो ने बताया कि आज ही के दिन गांव के 24 बच्चे, एक ड्राइवर, दो अध्यापक और एक अन्य व्यक्ति दर्दनाक हादसे का शिकार हुए थे।
लेकिन विडंबना यह है कि चाहे शासन हो या प्रशासन या फिर पक्ष हो या विपक्ष किसी ने भी न्याय की लड़ाई में उनका साथ नहीं दिया, जिससे हमारे बच्चों को इंसाफ मिल सके। उन्होंने कहा कि बेशक उनके कलेजे के टुकड़े अब दोबारा उनके पास वापस नहीं आ सकते, लेकिन अकाल मौत का ग्रास बनने वाले उन मासूम बच्चों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई से उनकी आत्मा को शांति मिलेगी।
सरकार डंगे की डैमेज रिपोर्ट भी नहीं मांग पाई
उन्होंने इस हादसे के लिए विभाग को दोषी ठहराते हुए सवाल किया कि इस हादसे के साल बीतने के बावजूद सरकार विभाग से डंगे की डैमेज रिपोर्ट नहीं मांग पाई है। इसे लापरवाही की हद नहीं तो और क्या कहें।