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नूरपुर बस हादसा: नाक रगड़े, प्रदर्शन किए, अब न्याय के लिए सबक सिखाएंगे परिजन

Wed, 10 Apr 2019 12:07 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नूरपुर (कांगड़ा)
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फाइल फोटो
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कांगड़ा जिले के नूरपुर क्षेत्र के मलकवाल-ठेहड़ संपर्क मार्ग पर चेली (खुवाड़ा) गांव में हुए दर्दनाक स्कूल बस हादसे में अपने जिगर के टुकड़ों को खोने वाले अभिभावकों के जख्म एक साल बीतने के बाद भी नहीं भर पाए हैं। पीड़ितों ने नाक भी रगड़े, प्रदर्शन भी किए पर आज तक न्याय नहीं मिला।

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आज भी उस भयावह हादसे को याद कर सहम जाते हैं। इस हादसे की जांच को लेकर शासन और प्रशासन से असंतुष्ट अभिभावकों व गांववासियों ने चेताया कि उनका पूरा गांव इस बार लोकसभा चुनावों का बहिष्कार करेगा। किसी भी दल को वोट नहीं डाला जाएगा। अगर राजनीतिक दल इन बच्चों को इंसाफ नहीं दिला सकते तो किसी भी पार्टी को इस गांव में वोट मांगने का कोई हक नहीं है।

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इस हादसे की पहली बरसी पर अभिभावकों व गांववासियों ने उन मासूम बच्चों की याद में घटनास्थल पर बनाए गए मंदिर में इकट्ठे होकर दिवंगत बच्चों की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही इस हादसे की उच्च स्तरीय जांच करवाने की गुहार को लेकर सरकार व प्रशासन के लचर रवैये के खिलाफ रोष भी जताया। 

24 बच्चों समेत 28 की गई थी जान
इन बच्चों के अभिभावकों विक्रम सिंह, कर्ण सिंह, हंस राज, सीमा देवी, राजेश, रघुवीर, रिंकू गुलेरिया, सोमा, मनोज, लक्की, अश्वनी, अनिता, सिमरन व अन्य गांववासियो ने बताया कि आज ही के दिन गांव के 24 बच्चे, एक ड्राइवर, दो अध्यापक और एक अन्य व्यक्ति दर्दनाक हादसे का शिकार हुए थे।

लेकिन विडंबना यह है कि चाहे शासन हो या प्रशासन या फिर पक्ष हो या विपक्ष किसी ने भी न्याय की लड़ाई में उनका साथ नहीं दिया, जिससे हमारे बच्चों को इंसाफ मिल सके। उन्होंने कहा कि बेशक उनके कलेजे के टुकड़े अब दोबारा उनके पास वापस नहीं आ सकते, लेकिन अकाल मौत का ग्रास बनने वाले उन मासूम बच्चों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई से उनकी आत्मा को शांति मिलेगी। 

सरकार डंगे की डैमेज रिपोर्ट भी नहीं मांग पाई
उन्होंने इस हादसे के लिए विभाग को दोषी ठहराते हुए सवाल किया कि इस हादसे के साल बीतने के बावजूद सरकार विभाग से डंगे की डैमेज रिपोर्ट नहीं मांग पाई है। इसे लापरवाही की हद नहीं तो और क्या कहें।
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