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हिमाचल सरकार में ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने दिया इस्तीफा

Fri, 12 Apr 2019 06:04 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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अनिल शर्मा - फोटो : फाइल फोटो
पिछले एक महीने से प्रदेश में चल रहा सियासी तूफान शुक्रवार को अपने चरम पर पहुंच गया। ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ चल रही जुबानी जंग के बीच शुक्रवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री ने भी सिराज दौरे के दौरान केंद्रीय नेतृत्व से फोन पर चर्चा के बाद शर्मा के इस्तीफे को स्वीकार करने का एलान कर दिया। अनिल के इस्तीफे के साथ ही मंडी संसदीय सीट पर चल रहे सियासी घमासान के और तेज होने का अंदेशा है।
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चलता रहा वाक् युद्ध

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फाइल फोटो
2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुए मंडी सदर से विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिल शर्मा मंगलवार को शिमला आए थे। अनिल ने मीडिया में सरकार के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर परिवारवाद और बाई चांस सीएम बनने जैसे बयान के बहाने जमकर हमला किया था लेकिन इसी बीच शुक्रवार को मुख्यमंत्री के मंडी दौरे के बीच अनिल ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया।
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फाइल फोटो
पत्र में अनिल शर्मा ने कहा कि सीएम के मंत्री के गुम होने वाले बयान से वह आहत हैं और जब सीएम को विश्वास ही नहीं है तो सरकार में रहने का क्या मतलब। इसके साथ ही अनिल ने फिर दोहराया कि वह न तो मंडी में पार्टी के किसी कार्यक्रम में भाग लेंगे और न मंडी संसदीय क्षेत्र के कांग्रेस से लोकसभा प्रत्याशी अपने बेटे आश्रय शर्मा के पक्ष में प्रचार करेंगे। अनिल के इस्तीफे के साथ ही अब उनके भाजपा में बने रहने को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

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फाइल फोटो
जानकारों के अनुसार चूंकि अभी उन्होंने पार्टी विरोधी गतिविधि में भाग नहीं लिया है। ऐसे में अभी उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई संभव नहीं है। जाहिर है शर्मा के इस नपेतुले कदम से भाजपा को उन्हें पार्टी से निकाल पाना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना आसान नहीं रहेगा।
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फाइल फोटो
भले ही अनिल शर्मा ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन अभी भी भाजपा के विधायक रहते हुए कांग्रेस प्रत्याशी और अपने बेटे आश्रय के लिए चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे। अनिल अगर बेटे का प्रचार करते हैं तो उनके खिलाफ भाजपा एंटी डिफेक्शन लॉ ला सकती है, जिसके चलते उनकी विधायकी चली जाएगी। ऐसे में मंडी सदर से विधानसभा उपचुनाव भी करवाना पड़ेगा। इसलिए अनिल फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं और उपचुनाव की तोहमत अपने सिर नहीं लेना चाहते।
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