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भले ही अनिल शर्मा ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन अभी भी भाजपा के विधायक रहते हुए कांग्रेस प्रत्याशी और अपने बेटे आश्रय के लिए चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे। अनिल अगर बेटे का प्रचार करते हैं तो उनके खिलाफ भाजपा एंटी डिफेक्शन लॉ ला सकती है, जिसके चलते उनकी विधायकी चली जाएगी। ऐसे में मंडी सदर से विधानसभा उपचुनाव भी करवाना पड़ेगा। इसलिए अनिल फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं और उपचुनाव की तोहमत अपने सिर नहीं लेना चाहते।