अमर उजाला से बातचीत में रामलाल ठाकुर ने कहा कि वह कभी टिकट की दौड़ में नहीं थे। उन्होंने टिकट के लिए आवेदन भी नहीं किया था। पार्टी ने जो भरोसा जताया है, उसके लिए वह आभारी हैं। पूर्व में मिली हार पर रामलाल ठाकुर ने कहा कि पहले की परिस्थितियां और थीं।
अब की बार हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में तीन बार के सांसद रहे अनुराग ठाकुर की कार्यप्रणाली से जनता ही नहीं भाजपाइयों में भी असंतोष है। कहा कि बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना जिले में कांग्रेस की स्थिति बेहतर है। लोक सभा चुनाव में उन्हें इसका लाभ मिलेगा।
भाजपा-कांग्रेस ने कांगड़ा से मंत्री किशन कपूर और पवन काजल, शिमला से कांग्रेस विधायक कर्नल धनी राम शांडिल, भाजपा विधायक सुरेश कश्यप और हमीरपुर से कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर सहित कुल पांच विधायकों पर दांव खेला है।
भाजपा ने दो मौजूदा सांसद हमीरपुर से अनुराग ठाकुर और मंडी से रामस्वरूप चुनाव मैदान में उतारे हैं। मंडी के सुखराम के पोते आश्रय पहली बार किस्मत आजमाएंगे।
हाईकमान पहले पूर्व अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू के नाम पर विचार कर रहा था, लेकिन पिछले कई दिनों से रामलाल ठाकुर और कर्नल धर्मेंद्र भी दौड़ में शामिल हो गए। शनिवार को स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यों ने हाईकमान के समक्ष एक पत्र रखा।
यह पत्र टिकट की दौड़ में शामिल कर्नल धर्मेंद्र ने लिखकर दिया था। इस पत्र में कर्नल धर्मेंद्र ने लिखा था कि अगर हाईकमान उसे टिकट नहीं दे रही है तो रामलाल ठाकुर को दें। इस पत्र के बाद स्क्र ीनिंग कमेटी के सदस्यों ने भी अपनी सहमति दे दी।
कांग्रेस नेताओं की एकजुटता से कटा चंदेल का पत्ता
भाजपा के पूर्व सांसद सुरेश चंदेल का नाम हमीरपुर के पैनल में पहले नंबर पर था, जबकि चंदेल ने अभी तक कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली है। बताते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कहने पर स्क्रीनिंग कमेटी को पैनल में चंदेल का नाम डालना पड़ा। चंदेल के अमित शाह से मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं ने टिकट न देने पर एकजुटता दिखाई और कांग्रेस में उनकी सदस्यता का मामला भी लटक गया।