कई लोगों को नोटबंदी के बाद अपना कारोबार बंद करके गांवों को लौटना पड़ा और कांग्रेस शासनकाल में शुरू की गई मनरेगा से 100 दिन का रोजगार हासिल करने को मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पांच साल में पेट्रोलियम के दामों को कम क्यों नहीं कर पाई जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम नीचे गए थे। एक देश एक टैक्स की बात कही गई और जीएसटी में पांच स्लैब बना दिए।
पेट्रोलियम, शराब और रियल इस्टेट पर ड्यूटी और टैक्स नहीं हटाया गया। किसानों की फसलों के दाम डेढ़ गुना नहीं किए जा सके। लोगों को अच्छे दिनों का वादा किया था और पांच साल में बुरे दिन देखने को मिले। देश में बेरोजगारी सात फीसदी बढ़ी है।
इन मुद्दों पर प्रधानमंत्री जवाब दें और देश की जनता से माफी मांगें। शर्मा ने कहा कि मोदी पूर्व प्रधानमंत्रियों और कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ बयानबाजी करते हैं तो उनको भाषा में संयम नहीं रहता।
मोदी को मर्यादित भाषा का उपयोग करके किसी पर निशाना साधना चाहिए। 1952 के बाद देश की जीडीपी सबसे कम है। परवाणू मिसाइलों को लेकर मोदी कहते हैं कि भारत बदले के लिए तैयार है और ऐसे बयान देना शोभा नहीं देता।
आनंद शर्मा ने कहा कि विश्व की बड़ी कंपनियों से ज्यादा धनराशि भाजपा ने चुनाव घोषित होने से पहले विज्ञापनों में खर्च की है। वर्ष 2014 में जब भाजपा सत्ता पर नहीं थी तो 36 हजार करोड़ व्यय किए।
वर्ष 2019 में चुनाव घोषित होने से पहले विज्ञापनों पर भाजपा ने 4,397 करोड़ खर्च डाले थे। भाजपा का यह विज्ञापन व्यय बड़ी कंपनियों के विज्ञापन से कहीं ज्यादा है।
आनंद शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अपशब्द बोलते हैं। पूर्व प्रधानमंत्रियों को बदनाम करते हैं। उन्होंने देश के प्रजातंत्र के लिए खतरा पैदा कर दिया है। शासन, प्रशासन और सरकारी एजेंसियों का प्रयोग विरोधियों पर करते है।
आयकर के छापे डलवाते हैं। पोस्टर लगाते हैं दमदार प्रधानमंत्री। शरीर के आधार पर कोई दमदार नहीं होता, दमदार तो दिमागी तौर पर होना चाहिए। मोदी की सेना कहना देश की सेना का अपमान है। सेना वह होती है जो देश के झंडे के तले देश हित के लिए युद्ध करे।