हिमाचल में लॉकडाउन के बीच लोग गुच्छी ढूंढने जंगलों में जा रहे हैं। यह प्राकृतिक तरीके से तैयार होती है। मार्केट में गुच्छी चार से पांच हजार रुपये प्रति किलो बिक रही है। गुच्छी मशरूम का कोई बीज नहीं होता है। यह प्राकृतिक तरीके से तैयार होती है। प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में देवदार, बान और कैल आदि के पेड़ों के नीचे गुच्छी मिल रही है। प्रदेश में गुच्छी शिमला, चंबा, सिरमौर, सोलन, चंबा आदि ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग जंगलों में निकलकर इसे ढूंढ रहे हैं।
कई लोगों को अपने खेतों में भी गुच्छी मिल रही है। गुच्छी शिमला के गंज शिमला बाजार के अलावा प्रदेश के अन्य बाजारों में भी बिकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई लोग गुच्छी खरीदते हैं। गुच्छी खरीदने वालों ने आयुर्वेद विभाग में पंजीकरण भी करवाया होता है। शिमला के ठियोग के निवासी रवींद्र शर्मा ने बताया कि माना जाता है कि बिजली कड़कने से गुच्छी की पैदावार होती है। इसके लिए आजकल का मौसम उपयुक्त होता है।