कोरोना के चलते कर्फ्यू और लॉकडाउन से देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। हर वर्ग को इसकी मार झेलनी पड़ रही है। निजी क्षेत्रों में कार्यरत कामगारों पर इसका ज्यादा असर है। वेतन न मिलने व देरी से मिलने की स्थिति में दो जून की रोटी मुश्किल हो गई है। मजबूरन, कामगार वर्षों तक कार्य कर बचाए गई जमा पूंजी खर्च करने पर विवश हैं।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में जमा ईपीएफ निकालना कर्मचारियों के लिए मजबूरी बन गया है। हिमाचल में चार हजार से अधिक कामगारों ने ईपीएफ निकालने के लिए आवेदन किया है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने करीब नौ करोड़ रुपये जारी भी कर दिए हैं। कोविड-19 के प्रकोप के बाद सरकार ने राहत देते हुए कर्मचारियों ने तीन महीने का वेतन जारी करना शुरू कर दिया है। ईपीएफओ का दावा है कि यह राशि आवेदन के 72 घंटों के भीतर आवेदनकर्ता कामगार के खाते में जमा की जा रही है।
केंद्र के वित्त मंत्रालय ने निजी क्षेत्र में कार्य कर कर्मचारी भविष्य निधि के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को राहत दी है। कर्मचारी व कामगार पीएफ खाते से तीन महीने का वेतन निकाल सकते हैं। कोविड-19 के प्रभाव के चलते कई उद्योग बंद हो गए हैं। इससे कामगारों को दो जून की रोटी के लाले पड़ रहे हैं। हिमाचल में पीएफ खाते से पैसे निकालने को 4297 लोगों ने आवेदन किया है। नाहन में तैनात ईपीएफओ के सहायक आयुक्त एसके शर्मा ने बताया कि ये आवेदन ऑनलाइन किए जा रहे हैं। क्लेम की राशि सीधा आवेदनकर्ता के खाते में आ रही है। ऐसे मामलों का निपटारा ईपीएफओ 72 घंटों में कर रहा है।
ईपीएफओ के 65 लाख पेंशनर्स को समय पर मिलेगी पेंशन
लॉकडाउन के बीच कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के 65 लाख पेंशनर्स को समय पर पेंशन मिलेगी। ईपीएफओ ने इसके लिए 764 करोड़ जारी किए है। बैंकों को निर्देश दिए कि पेंशनर्स के खाते में पेंशन की रकम डालें। सहायक आयुक्त एसके शर्मा ने बताया कि श्रम मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान ईपीएफओ के सभी 135 क्षेत्रीय कार्यालयों ने पेंशनभोगियों की सुविधा को देखते हुए अप्रैल 2020 की पेंशन समय से पहले जारी कर दी।