लोन वापस न करने पर हिमाचल में तीन उद्योगों की करोड़ों की संपत्ति बेचने की नौबत आ गई है। करोड़ों रुपये की यह संपत्ति हिमाचल प्रदेश वित्त निगम बेचने जा रहा है।
ये संपत्तियां भूमि, भवन, मशीनरी आदि के रूप में हैं। इनमें से तीन उद्योग बद्दी के झाड़माजरी में हैं तो एक-एक उद्योग हमीरपुर, ऊना और कांगड़ा में स्थापित हैं।
हालांकि, वर्तमान में ये वित्त निगम के नियंत्रण में होने से बंद हैं। बेची जा रही इकाइयों में से झाड़माजरी में मैसर्ज तेजपाल साल्दी एक्सपोर्ट की टैक्सटाइल इंडस्ट्री है। इसकी 24.31 करोड़ की संपत्ति बेची जा रही है।
एलोपैथिक दवाओं की मैसर्ज अनुराग फार्मासियुटिकल्स की संपत्ति भी झाड़माजरी में है। इसका मूल्य 4 करोड़ 64 लाख रुपये है। फ्लोर मिल की मैसर्ज वर्मा रोलर्स की संपत्ति हमीरपुर में है। इसका मूल्य 52.80 करोड़ है।
इसी तरह से मैसर्ज अंबिका आटो इंडस्ट्रीज टाहलीवाल की संपत्ति का 14.25 लाख रुपये रखा है। रेडीमेड गारर्मेंट्स की मैसर्ज मनु गारमेंट्स की संपत्ति 9.58 लाख रुपये है।
इन उद्योगों ने वित्त निगम से कई वर्ष पूर्व लोन लिए थे, जो वापस नहीं किए। ये अब बंद चल रहे हैं। इनकी संपत्ति को उद्योग निगम ने कब्जे में लिया है। उसी के बाद इनकी सेल के लिए नोटिस निकाले गए हैं।
हिमाचल प्रदेश वित्त निगम के मुख्य महाप्रबंधक बीडी कश्यप के अनुसार इन उद्योगों को संपत्ति को लंबे समय तक लोन अदायगी नहीं करने पर कब्जे में लिया गया। अब बेचा जा रहा है। टाहलीवाल के उद्योग की संपत्ति को बेचने की प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है। बाकी इकाइयों की प्रॉपर्टी के लिए अभी ग्राहक नहीं मिले हैं।