कुल्लू के रूमसू गांव में अपबीती सुनाते चंद्रखणी जोत से रेस्क्यू किए गए छात्र।
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समुद्र तल से करीब 12 हजार फुट ऊंचे चंद्रखणी जोत पर फंसे इंजीनियरिंग छात्र और एक गाइड 72 घंटे तक भूखे पेट माइनस तापमान में मौत को मात देकर सुरक्षित निकल आए हैं। कुल्लू अस्पताल में इलाज करवा रहे चंबा के अक्षय कुमार और अंबाला के चेतन ने बताया कि चंद्रखणी के आसपास पहुंचते ही बर्फबारी शुरू हो गई थी।
चारों तरफ अंधेरा छा गया। बिजली महादेव से उन्होंने ट्रैकिंग शुरू की थी। उन्हें यह पता नहीं था कि वे किस लोकेशन पर हैं। मोबाइल बैटरियां जवाब दे चुकी थीं। पर खुशकिस्मती यह रही है कि अनिल के मोबाइल की बैटरी काम कर रही थी। अनिल ने पुलिस हेल्प लाइन के 100 नंबर पर डायल किया। बताया कि वे चंद्रखणी में फंसे हैं। महज आधा मिनट बातचीत के बाद यह बैटरी भी बंद हो गई।
माइनस तापमान और बर्फबारी से बचने के लिए गुफा में टैंट लगाकर शरण ली। वहां खाने के नाम पर बर्फ थी तो पीने के लिए पानी की तीन बोतलें। एक वक्त ऐसा भी आया जब जिंदा बचने की आस छोड़ दी। लेकिन वे जिंदगी की जंग लड़ते रहे। छात्र अंकुश ने बताया कि 12 मार्च को चंद्रखणी के ऊपर से हेलीकाप्टर गुजरते देखा तो जान में जान आ गई।
लेकिन धुंध के कारण रेस्क्यू दल उन्हें देख नहीं पाया। वे पेड़ों पर चढ़ गए और लाल रंग के कपड़े बांध दिए। छात्रों ने बताया कि शनिवार को अनिल और हितेंद्र उनसे बिछड़ गए। ये दोनों अभी भी फंसे हुए हैं। उपायुक्त हंस राज चौहान के अनुसार सोमवार को इन छात्रों को भी हेलीकाप्टर से निकाला जाएगा।