कमीने, ओंकारा, ब्लू अंबरेला जैसी कई फिल्मों के निर्देशक और पटकथा लेखक विशाल भारद्वाज ने कहा कि रस्कि न साहब की ब्लू अंबरेला बहुत छोटी कहानी थी। छाता चुराने के बाद चोर पकड़ा जाता है। इसमें चोर पकड़ा जाता था। यह 45-50 मिनट की लघु फिल्म मिलती थी। अपने यहां एक कहानी है, सियार के रंग में गिर गया। उसका रंग बदल गया। उससे एक क्लू मिला। एक डेढ़ साल बाद याद आया कि छतरी न मिले तो आगे वह पूरी फिल्म बनेगी। इसके बाद इस पर फिल्म बनी। वह यह इसलिए कहना चाहते हैं कि सिनेमा में फाइन आर्ट्स का मिश्रण है। चित्रकला, संगीत, काव्य इसमेें सब होता है। यह तो साहित्य से भी पार जाता है। उनके लिए साहित्य यही है।