शराब कारोबार के बहुचर्चित ढाई करोड़ के घपले में अंतरिम जमानत पर चल रहे आरोपियों की शनिवार को अदालत ने जमानत याचिका रद्द कर दी है। अब विजिलेंस ने आरोपियों की गिरफ्तारी को कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में आरोपी हरप्रिया मिन्हास, एमिल मिन्हास तथा रोहित कुमार ने ऊना अदालत से अंतरिम जमानत ली थी।
तीनों अदालत में बीते 16 सितंबर को पेश हुए थे। कोर्ट ने सुनवाई को 20 सितंबर की तिथि तय की थी। शुक्रवार को तीनों आरोपी कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत पर फैसला शनिवार के लिए सुरक्षित रखा था। अदालत ने इनकी जमानत रद्द कर दी है।
बताया जा रहा है कि आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने अदालत में पक्ष रखा। आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुए। जमानत याचिका रद्द होते ही तीनों आरोपी भूमिगत हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक विजिलेंस ने दोपहर बाद उनके कई ठिकानों पर दबिश भी दी। उधर, विजिलेंस के एएसपी सागर चंद्र ने कहा कि विजिलेंस टीम ने आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर उनके ठिकानों पर छापा मारा, लेकिन आरोपी अपने ठिकानों से गायब हो गए हैं।
यह है मामला
सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगाने वाले शराब कारोबारियों ने कंप्यूटर के माध्यम से बड़ी सफाई से स्कैन कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इसमें ऑनलाइन पेमेंट की फर्जी रसीदें विभाग को पेश की गईं, जबकि हिमाचल ग्रामीण बैंक ऊना शाखा के नाम पर 33 लाख 63 हजार की फर्जी एफडीआर तक बनाकर विभाग में प्रतिभूति के तौर पर जमा करवा दी गई। यह घोटाला अप्रैल 2018 से जुलाई 2019 तक के बीच का बताया जा रहा है, जिसका खुलासा एजी के ऑडिट में हुआ है।