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शहर में लिफ्ट, 3 सड़कें और 4 पार्किंग बनाने का सपना टूटा

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अधूरी प्लानिंग से बने प्रोजेक्ट हो गए रिजेक्ट, कई जगह फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं ले पाए
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क्रॉसर
फागली, बालूगंज और कंगनाधार में बननी थी पार्किंग
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में स्मार्ट सिटी मिशन से शहरवासियों की सुविधा के लिए लिफ्ट और पार्किंग समेत कई नई सड़कों को बनाने का सपना टूट गया। स्मार्ट सिटी के निदेशक मंडल ने अपने कामों की सूची से जिन बड़े प्रोजेक्टों को बाहर करने का फैसला लिया है, उनमें लिफ्ट समेत शहर की चार बड़ी पार्किंग और तीन नई सड़कें शामिल हैं।
फॉरेस्ट क्लीयरेंस समेत कई जगहों पर जमीन न मिलने से यह प्रोजेक्ट रद्द किए गए हैं। लक्कड़ बाजार में कार्टरोड से बैंटनी कैसल तक अब लिफ्ट नहीं बनेगी। फॉरेस्ट क्लीयरेंस के चलते पांच करोड़ का यह प्रोजेक्ट रिजेक्ट कर दिया है। इसी तरह शहर की पहली स्टेक पार्किंग समेत चार बड़ी पार्किंग भी सूची से बाहर कर दी हैं। तीन करोड़ की लागत से बनने वाली यह स्टेक पार्किंग एसडीए कांप्लेक्स कसुम्पटी में बननी थी। रोपवे अथॉरिटी को इसका जिम्मा दिया था। लेकिन मौके पर जमीन न मिलने से यह रद्द हो गई। इसी तरह पांच करोड़ से फागली, पांच करोड़ से बालूगंज और पांच करोड़ से कंगनाधार में प्रस्तावित पार्किंग भी सूची से बाहर हो गई हैं। कंगनाधार और फागली में भी पार्किंग के लिए जमीन नहीं मिली। नगर निगम के अफसरों ने दफ्तरों में बैठकर यहां पार्किंग बनाने के सपने तो दिखाए लेकिन इनकी क्लीयरेंस और फिजिबिलिटी पर काम नहीं किया। बालूगंज में पार्किंग कांप्लेक्स लोनिवि के फंड से बनेगा।
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इसी तरह 2.75 करोड़ से ढली टनल से मशोबरा चौक तक एनएच के दोनों किनारों पर ड्रेन और फुटपाथ बनाने का प्रोजेक्ट भी तैयार किया था। लेकिन एनएच अथॉरिटी का कहना है कि इसमें फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पेच है। ऐसे में इसे रिजेक्ट कर दिया है। स्मार्ट सिटी के महाप्रबंधक ब्रह्म प्रकाश ने कहा कि निदेशक मंडल में इस बारे में फैसला लिया गया है। बचे हुए प्रोजेक्टों में तेजी लाने पर काम किया जा रहा है।
यह प्रोजेक्ट भी कर दिए रिजेक्ट
दो करोड़ से ताराहाल और ऑकलैंड टनल के पास ओवरब्रिज
10 करोड़ से प्रस्तावित लोअर बाजार, रामबाजार में ड्रेनेज एंड डक्ट सिस्टम
6 करोड़ से गंज, कृष्णानगर में नगर निगम के पुराने भवनों की जगह नये ब्लॉक का निर्माण
4.70 करोड़ से संजौली बाजार को चौड़ा करने का प्रोजेक्ट
ढली वर्कशॉप को अपग्रेड करने का प्रोजेक्ट, ये काम अब पीपीपी मोड पर होगा
हेडिंग
अफसरों की लापरवाही की भेंट
चढ़े सड़कों के तीन बड़े प्रोजेक्ट
सबहेड
न्यू शिमला से टुटीकंडी तक बननी थी सड़क
क्रॉसर
मैहली-शोघी बाइपास तक नहीं बनेगी अब सड़क
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में यातायात जाम खत्म करने और उपनगरों के बीच शार्टकट मार्ग तैयार करने के लिए तैयार किए तीन नई सड़कों के प्रोजेक्ट भी स्मार्ट सिटी मिशन से रद्द कर दिए हैं। इन तीनों सड़कों पर 30 करोड़ खर्च होने थे। सबसे बड़ा 24 करोड़ का प्रोजेक्ट न्यू शिमला सेक्टर तीन से टुटीकंडी चिड़ियाघर तक नई सड़क बनाने का था।
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दो साल में इसमें न फिजिबिलिटी देखी न निरीक्षण किया। इसलिए इसे सूची से बाहर कर दिया। दूसरी तीन करोड़ की सड़क कंगनाधार से डीएवी न्यू शिमला तक बननी थी। यहां क्लीयरेंस तक नहीं ले पाए। तीसरी सड़क 2.25 करोड़ से न्यू शिमला सेक्टर चार को मैहली शोघी बाइपास से जोड़ने के लिए बननी थी। यह तीनों प्रोजेक्ट नगर निगम, लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने तैयार किए थे। लेकिन इन्हें तैयार करते वक्त यह नहीं देखा कि यह क्षेत्र एडीबी एरिया से बाहर है। दो साल से अफसर जनता को इनके सपने दिखाते रहे। आखिर में अब निदेशक मंडल ने इन्हें एडीबी एरिया से बाहर होने का हवाला देते हुए खारिज कर दिया। टुटू चौक से पावर हाउस तक सड़क चौड़ी करने का दो करोड़ का प्रोजेक्ट एडीबी एरिया से बाहर होने के कारण रद्द कर दिया गया। एडीबी एरिया शहर के सर्कुलर रोड के भीतर का क्षेत्र है जिसे कोर एरिया भी कहा जाता है। स्मार्ट सिटी के काम इसी क्षेत्र में करने का प्लान सरकार को सौंपा था।
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