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सरकार ने कम की पंचायत प्रधानों की शक्तियां

Mon, 20 Jul 2015 08:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश पंचायतीराज विभाग ने बढ़ते विवादों के मद्देनजर पंचायत प्रधानों की शक्तियों में कटौती कर दी है। अब पंचायत प्रधान सामान्य बैठकें कर प्रोजेक्टों, दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को ही नहीं, बल्कि जनहित के संस्थानों के लिए भी एनओसी जारी नहीं कर सकेंगे। ये एनओसी ग्रामसभाओं से अप्रूवल के बाद ही दिए जा सकेंगे।
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राज्य पंचायतीराज विभाग ने सभी जिला पंचायत अधिकारियों और समस्त खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस निर्देश को लागू करें। प्रदेश में विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ाधड़ नए प्रोजेक्टों से लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठान तक खोले जा रहे हैं। यही नहीं, कई विभाग भी ग्राम पंचायतों की परिधि में अपने कार्यालयों के भवन आदि खोल रहे हैं।

इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायत का अनापत्ति प्रमाणपत्र जरूरी होता है। आमतौर पर ग्राम पंचायतें सामान्य बैठक कर ही एनओसी दे देती हैं। सामान्य बैठकें महीने में दो बार हो जाती हैं, जबकि ग्रामसभाएं साल में कम से कम चार बार होनी जरूरी होती हैं। ग्रामसभाओं में पंचायत के लोगों का एक निर्धारित कोरम होना भी जरूरी होता है।
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यानी ग्राम पंचायत के एक-तिहाई लोगों का ग्रामसभाओं की बैठकों में आना आवश्यक हो जाता है। सामान्य बैठकों में केवल पंचायत प्रतिनिधियों का कोरम ही पूरा होना चाहिए। ऐसी स्थिति में ऐसे एनओसी देने का मामला ग्रामसभाओं पर छोड़ दिया गया है। राज्य पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक केवल शर्मा ने कहा है कि एनओसी देने के लिए केवल ग्राम सभाएं ही अधिकृत होंगी।

ग्रामसभाओं की बैठकों में एप्रूवल के बाद ही पंचायतें इन्हें आगे दे सकेंगी। सामान्य बैठकों से ये अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं दिए जा सकेंगे। इस बारे में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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