डाउनडेल इलाके से दिवाली की रात को पांच साल के बच्चे के गायब होने से माहौल गमगीन है। मासूम योगराज के अचानक गायब होने की घटना से हर कोई स्तब्ध है। रात को दिवाली का जश्न मना रहे लोगों को जैसे ही इस घटना का पता लगा तो लोग पटाखे चलाना छोड़कर बच्चे की तलाश में जुट गए। घटना के दूसरे दिन सुबह डाउनडेल बस्ती में सन्नाटा पसरा रहा। दस बजे के बाद जैसे ही वन विभाग, पुलिस और लोगों की आवाजाही बढ़ी तो बच्चे के मिलने की उम्मीद लगाए बैठी मां बबली की चीख पुकार भी बढ़ गई।
पड़ोसी और रिश्तेदार हौसला बंधाते रहे लेकिन बेटे को याद कर मां आंसू नहीं रोक पा रही थी। कहा कि योगराज सबका लाडला था। पहले लगा कि वह आंगन में गिर गया होगा लेकिन जब आंगन और इसके नीचे जाकर देखा तो योगराज नहीं मिला। पिता केदार खुद पुलिस और वन विभाग के साथ दिन भर बेटे की तलाश में जुटे रहे। लेकिन शाम तक बेटे का कोई सुराग नहीं लग पाया।
बड़ी बहन दामिनी का भी रो-रोकर बुरा हाल
योगराज की बड़ी बहन दामिनी भी कभी मां के पास आकर रोती तो कभी घर के कोने में जाकर बैठकर सिसकियां भरतीं। घटना के वक्त जो बच्चा रात को योगराज के साथ खेल रहा था वह भी डरा हुआ था।
राजधानी के रिहायशी इलाकों में तेंदुए के घूमने की घटनाओं से शहरवासी दहशत में हैं। खाली पिंजरे लगाकर तेंदुए पकड़ने की वन विभाग की मुहिम देखकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। शहर में इसी साल तेंदुए के दिखने और हमला करने की दो दर्जन से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद वन विभाग एक भी तेंदुए को पकड़ नहीं पाया है। शहर के कनलोग में पांच अगस्त को तेंदुए ने छह साल की बच्ची को उठा लिया था।
दूसरे दिन बच्ची के अवशेष जंगल में मिले थे। आज तक इस आदमखोर तेंदुए का भी कोई पता नहीं चला। वन विभाग ने कुछ दिन तो पिंजरा लगाया, फिर बाद में खाली रखकर छोड़ दिया। कुछ महीने पहले कृष्णानगर में पालतू कुत्ते का शिकार करने आए तेंदुए ने घर में घुसकर तेंदुए ने एक युवक को लहूलुहान कर दिया था।
तेंदुए को युवक ने कमरे में बंद किया तब जाकर वन विभाग इसे पकड़ा। विकासनगर, समिट्री, कनलोग, खलीनी और फागली आदि इलाकों में भी आए दिन तेंदुए के रिहायशी इलाकों में घूमने तथा कुत्तों का शिकार करने की शिकायतें आ चुकी हैं। लेकिन आज तक कोई तेंदुआ पकड़ में नहीं आ रहा। वन विभाग सिर्फ लोगों को रात के समय अलर्ट रहने को कह रहा है। कसुम्पटी पार्षद राकेश चौहान ने कहा कि राजधानी में ही तेंदुआ दहशत मचा रहा है। विभाग के लिए लोगों की जान से ज्यादा जानवर प्यारे हैं। दिन में बंदर परेशान कर रहे हैं तो रात को तेंदुआ जान ले रहा है।
जंगल से सटे रिहायशी इलाकों की हो फेंसिंग
शहर में जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में तेंदुए के घूमने की सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में लोग इन इलाकों में जंगल की फेंसिंग करने की भी कई बार मांग उठा चुके हैं। कनलोग में हुई घटना के बाद लोगों ने इस मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था। अब फागली पार्षद जगजीत बग्गा का कहना है कि जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में फेंसिंग होनी चाहिए।