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तेंदुए के हमले में घायल रेंज ऑफिसर पीजीआई रेफर, हालत गंभीर

Sat, 04 Feb 2017 10:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊना
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हिमाचल के ऊना क्षेत्र के डठवाड़ा में खूंखार तेंदुए के हमले में बुरी तरह से घायल हुए विभाग के रेंज ऑफिसर राजेश ठाकुर को गंभीर हालत में पीजीआई रेफर कर दिया गया। तेंदुए के हमला करने के बाद राजेश ठाकुर के सिर को तेंदुए ने जबड़े में जकड़े रखा था।
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जिससे वह बुरी तरह से लहूलुहान हो गए थे। वहीं तेंदुए की मौत मामले में पशु चिकित्सकों और वन विभाग के विशेषज्ञों द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में उसे छर्रे लगने का खुलासा हुआ है। जिसके आधार पर पुलिस ने अज्ञात शिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गौर है कि सर्च ऑपरेशन के दौरान घात लगाकर बैठे तेंदुए ने आरओ पर हमला कर बुरी तरह से लहूलुहान कर दिया था। जिसके बाद उनके बचाव के लिए स्थानीय लोगों और विभाग के कर्मचारियों ने प्रयास करते हुए तेंदुए के चुंगल से बाहर निकाला।
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आरओ राजेश ठाकुर का बचाव करते तेंदुए पर लोगों ने प्रहार किया जिससे उसकी मौत हो गई थी। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तेंदुए को छर्रे लगने का खुलासा हुआ है। जिसके आधार पर पुलिस ने अज्ञात शिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

उधर पुलिस अधीक्षक अनुपम शर्मा ने बताया कि पुलिस ने मामले के संदर्भ में अज्ञात शिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जल्द ही आरोपियों को पकड़ा जाएगा।
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राजनेता नहीं जानते खाली हाथ जंगली जानवरों से कैसे जूझा जाता है : तंवर

ऊना में तेंदुए के हमले में घायल वन विभाग की टीम के मामले पर पूर्व वन अधिकारी और किसान सभा के राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चौबीस घंटे अंगरक्षकों के साये में चलने वाले राजनेताओं को कहां पता कि खाली हाथ खूंखार जंगली जानवरों से कैसे जूझा जाता है।

वन विभाग में जंगली जानवरों को काबू करने के लिए जरूरी हथियार और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के अभाव के लिए कौन जिम्मेवार है? सरकार और अधिकारियों को इसका जवाब देना चाहिए। तंवर ने कहा कि बंदरों की नसबंदी पर 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने वाली सरकार के वन विभाग के स्टाफ  के पास जंगली जानवरों से निपटने के लिए जरूरी हथियार और आत्म रक्षक सामग्री तक उपलब्ध नहीं है।

ट्रेंक्युलाइजर गन जैसी छोटी सुविधा भी यहां नहीं है। अगर स्टाफ  वक्त पर कार्रवाई न करे तो जनता उसके खिलाफ  हो जाती है। राजनेता तबादले की धमकी देकर निचले स्टाफ  को डराते हैं। अगर कोई कदम उठाएं तो जान का जोखिम है।

उन्होंने कहा कि साहस करके अगर वन विभाग का स्टाफ  लोगों की रक्षा करते हुए घायल हो जाए या उन्हें कोई नुकसान पहुंचे तो उनकी पीठ थपथपाने के बजाय उनसे उल्टा सवाल किया जाता है कि वे बिना इंतजाम के क्यों निकले थे। डॉ. तंवर ने वनाधिकारी राजेश कुमार को मुफ्त चिकित्सा सहायता की मांग के साथ सरकार से वन विभाग को आत्मरक्षा के पूरे साजो सामान से लैस करने की मांग भी की है।
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