हिमाचल प्रदेश के लिए प्रस्तावित लोकायुक्त का आदेश न मानना न्यायालय की तरह अवमानना के दायरे में लाया जा रहा है। प्रदेश की अफसरशाही के भारी विरोध के बावजूद सरकार की ओर से गठित प्रवर समिति ने लोकायुक्त को यह अधिकार दे दिया है।
इससे प्रदेश के भ्रष्ट अधिकारियों, कर्मचारियों और नेताओं पर अंकुश लगाने में काफी मदद मिलेगी। सरकार ये अध्यादेश लाए या नहीं, इस पर फैसला वीरवार को कैबिनेट में होने की संभावना है।
प्रदेश सरकार की ओर से कौल सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में गठित प्रवर समिति ने हिमाचल प्रदेश में एक सदस्यीय लोकायुक्त के गठन करने की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर न्यायाधीश को लोकायुक्त बनाया जा सकता है।
समिति के अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर ने बताया कि लोकायुक्त का आदेश न मानना ‘न्यायालय की अवमानना’ के दायरे में आएगा। लोकायुक्त के फैसले को मानना अफसरों के लिए बाध्य होगा। यह अधिकार केंद्रीय लोकायुक्त से हटकर दिया गया है।
यह होंगे लोकायुक्त सर्च कमेटी में
लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी बनाई जाएगी। इसमें विधानसभा के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और अन्य को शामिल किया जाएगा।