विवि में भाषाओं की विकसित भूमिका पर चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि शोध और अनुसंधान को आम जन तक पहुंचाने में भाषा का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए सरल भाषा और साधारण शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए।
कुलपति ने यह बात विश्वविद्यालय के भाषा संकाय के कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुई कही। कार्यक्रम में
कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस) आपदा-प्रतिरोध क्षमता, पर्यावरण जागरुकता और भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) में भाषाओं की विकसित होती भूमिका विषय पर चर्चा की गई। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के लिए भाषा संकाय के प्रयास की सराहना की। उन्होंने शिक्षकों और छात्र-छात्राओं के साथ संवाद भी किया। संवाद एवं चर्चा का केंद्र विश्वविद्यालय में हाल ही में स्थापित पांच अनुसंधान केंद्र रहे। कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने प्राध्यापकों को पर्यावरणीय मुद्दों, डाटा साइंस, हरित ऊर्जा और क्वांटम भौतिकी पर गहन शोध करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नैनो तकनीकों के महत्व पर बल देते हुए धर्म और अध्यात्म के साथ उनके समन्वय पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न विषयों में शोध परिणामों की सटीकता हेतु मजबूत डाटा-बेस संग्रहण की आवश्यकता जताई। इस अवसर पर प्रो. नैनजीत सिंह नेगी, प्रो. नीलिमा कंवर, प्रो. मीनाक्षी एफ पॉल और प्रो. संजना शमशेरी मौजूद रहीं। सत्र का संचालन संस्कृत विभाग की डॉ. सपना चंदेल ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. भवानी सिंह ने पेश किया।